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सरकारी दवाइयों का `कत्ल’ कूड़े के ढेर में मिला …४,८०० एल्बेंडाजोल दवाओं का जखीरा!

जालौन से सामने आया चौंकाने वाला मामला
उत्तर प्रदेश के जालौन से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां सरकारी स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही देखने को मिली। बुधवार को नगर के रिहायशी बस्ती से बाहर वैâलिया बाईपास से नदीगांव को जोड़ने वाले लिंक सड़क पर नारायणपुरी मंदिर के पास कूड़े के ढेर में सरकारी दवा ‘एल्बेंडाजोल’ के सैकड़ों पैकेट पड़े हुए मिले। सरकारी दवाइयों के इस तरह खुले में पड़े होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया गया है कि एल्बेंडाजोल दवा आमतौर पर बच्चों और बड़ों को कृमि नियंत्रण अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा वितरित की जाती है, लेकिन बड़ी मात्रा में इन दवाइयों का कूड़े के ढेर में पड़ा मिलना हैरानी की बात है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ये दवाइयां जरूरतमंदों तक पहुंचतीं तो संबंधित लोगों को लाभ मिल सकता था, लेकिन इस तरह फेंक दिए जाने से सरकारी संसाधनों की बर्बादी सामने आ रही है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये दवाइयां किस स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित हैं और इन्हें यहां किसने तथा किस मंशा से फेंका। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रील में `ऑल इज वेल’, हकीकत में स्वास्थ्य विभाग फेल
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि जालौन की सड़कों पर फेंकी गई ये दवाइयां भाजपा सरकार के `उत्तम स्वास्थ्य’ के दावों की पोल खोल रही हैं। सही दवाइयां कूड़े के ढेर में सड़ रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री जी, जनता को आपकी `औचक निरीक्षण’ वाली रील नहीं, अस्पतालों में इलाज और दवाइयां चाहिए। यह जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है या कमीशनखोरी का खेल?

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