मुख्यपृष्ठनए समाचारआर्थिक समीक्षा की बिगड़ी तस्वीर...विकास की दौड़ में महाराष्ट्र फिसड्डी!

आर्थिक समीक्षा की बिगड़ी तस्वीर…विकास की दौड़ में महाराष्ट्र फिसड्डी!

-प्रति व्यक्ति औसत आय में गोवा-दिल्ली आगे

-बिजली उत्पादन और सड़क घनत्व में भी पिछड़ा

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंब

आर्थिक समीक्षा २०२५-२६ के आंकड़ों ने महाराष्ट्र के विकास मॉडल की कड़वी तस्वीर सामने रख दी है। देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाने वाले राज्य की स्थिति कई अहम मानकों पर उम्मीद से कमजोर दिखाई दे रही है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में गोवा और दिल्ली जैसे राज्य महाराष्ट्र से आगे निकल चुके हैं, जबकि बिजली उत्पादन और सड़क घनत्व जैसे बुनियादी संकेतकों में भी राज्य पिछड़ता नजर आ रहा है। सबसे चिंताजनक तस्वीर दूरदराज जिलों की है, जहां उद्योग और निवेश के अभाव में रोजगार का गहरा संकट पैदा हो गया है। इन आंकड़ों ने साफ संकेत दिया है कि तेज विकास के दावों के बावजूद राज्य में विकास का लाभ कुछ शहरों तक सिमट कर रह गया है, जबकि ग्रामीण और पिछड़े जिले अब भी बुनियादी अवसरों के लिए जूझ रहे हैं।
महाराष्ट्र की आर्थिक समीक्षा २०२५-२६ ने राज्य के विकास मॉडल पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण मानकों पर महाराष्ट्र अन्य राज्यों से पीछे दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य की प्रति व्यक्ति आय ३,१७,८०१ रुपए है, जबकि गोवा में ७,६४,३९२ रुपए, दिल्ली में ४,९३,०२४ रुपए और कर्नाटक में
३,८०,९०६ रुपए है। औद्योगिक क्षेत्र की तस्वीर भी उतनी संतोषजनक नहीं है। राज्य में २१,१९६ कार्यरत कारखाने हैं लेकिन तमिलनाडु में लगभग ३२ हजार और गुजरात में २६,६६३ में उद्योगों की संख्या अधिक है। ऊर्जा क्षेत्र में भी महाराष्ट्र पीछे दिखाई देता है। राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली उत्पादन १,०९५.७० किलोवाट घंटा है, जबकि गुजरात और पंजाब इससे कहीं आगे हैं।
निवेश अब भी मुंबई-पुणे-नाशिक के ‘गोल्डन ट्राईएंगल’ तक सीमित
आर्थिक समीक्षा का सबसे गंभीर पहलू राज्य के भीतर बढ़ती क्षेत्रीय असमानता है। उद्योग और निवेश अब भी मुंबई-पुणे-नासिक के ‘गोल्डन ट्राईएंगल’ तक सीमित हैं। अकेले पुणे जिले में ४,०६५ कारखाने हैं, जहां लगभग ५.७६ लाख लोगों को रोजगार मिला है। इसके विपरीत हिंगोली में १७, नंदुरबार में ९९ और गढ़चिरौली में केवल २८ कारखाने हैं।
बुनियादी ढांचों में भी महाराष्ट्र पीछे
बुनियादी ढांचे के मामले में भी महाराष्ट्र कई राज्यों से पीछे है। राज्य में प्रति १०० वर्ग किलोमीटर पर २०७ किमी सड़कें हैं, जबकि केरल में यह आंकड़ा ६६९ किमी और दिल्ली में १,०९० किमी है। दूसरी ओर महाराष्ट्र की साक्षरता दर ८२.३४ फीसद है, जबकि केरल में यह ९४ फीसदी तक पहुंच चुकी है। वहीं राज्य में शिशु मृत्यु दर १४ है, जबकि केरल ने इसे घटाकर ५ तक कर दिया है।

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