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प्रदूषण और ट्रैफिक का पंगा … मुंबई के विकास पर भाजपा में ही मतभेद! …परियोजनाएं पूरी करने के लिए सीएम चाहते हैं २४ घंटे निर्माण

– भाजपा नगरसेविका चाहती हैं सिर्फ १२ घंटे ही हो काम
– मनपा में लाएंगी प्रस्ताव, समय में बदलाव की करेंगी मांग
रामदिनेश यादव / मुंबई
मुंबई के विकास को लेकर अब भाजपा के भीतर ही खुला मतभेद सामने आने लगा है। एक तरफ मुख्यमंत्री विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए शहर में २४ घंटे निर्माण कार्य जारी रखने के पक्ष में हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के ही लोग इसके खिलाफ हैं। भाजपा की नगरसेविका अलका केरकर ने सीएम फडणवीस के सपने को झटका देते हुए मुंबई के विकास काम की रफ्तार को कंट्रोल में लाने के लिए मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मांग की है कि मुंबई में विभिन्न परियोजनाओं के निर्माण कार्यों को केवल सुबह ७ बजे से शाम ७ बजे तक ही सीमित किया जाए।
बता दें मुंबई मनपा में जब से नई महापौर आई हैं, तब से सीएम फडणवीस के आदेशों को बदलने का काम शुरू हो गया है। हाल ही में महापौर रितु तावड़े ने सीएम फडणवीस के द्वारा मनपा के इंजीनियरों के तबादले पर लगी रोक के निर्णय को भी बदलने का काम किया, जिसके बाद फडणवीस के आदेश को नकारने वाली महापौर तावड़े को लेकर विधानमंडल में भी मामला गूंजा।
मुंबई में दो हजार निर्माण स्थल
शहर और उपनगरों में मिलाकर दो हजार से अधिक निर्माण कार्य जारी हैं। सरकार का मानना है कि यदि काम चौबीसों घंटे जारी रहे तो परियोजनाएं जल्दी पूरी होंगी और शहर को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन भाजपा की ही नगरसेविका अलका केरकर ने इस नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुंबई में ध्वनि और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ा!
भाजपा के भीतर घमासान

मुंबई में ध्वनि और वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। इसके लिए भाजपा के भीतर ही घमासान देखने को मिल रहा है। भाजपा नगरसेविका अलका केरकर इसके लिए शहर में दिन-रात चलनेवाले निर्माण परियोजनाओं को जिम्मेदार बता रही हैं। उनके अनुसार, मशीनों की तेज आवाज और लगातार चल रहे काम से स्थानीय नागरिकों की नींद और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर आम लोगों की जिंदगी को नजरअंदाज किया जा रहा है। वे सभागृह में प्रस्ताव लाने वाली हैं कि निर्माण कार्यों को केवल सुबह ७ बजे से शाम ७ बजे तक ही अनुमति दी जाए। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है तो सरकार की तेज रफ्तार वाली निर्माण नीति को बड़ा झटका लग सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल प्रदूषण या समय सीमा का नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर बढ़ते मतभेदों का संकेत है। मुख्यमंत्री जहां विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए चौबीसों घंटे काम करवाना चाहते हैं, वहीं उनकी ही पार्टी के नगरसेवक अब इस मॉडल पर सवाल उठाने लगे हैं।

 

 

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