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राज्य का भविष्य अधर में जनता की समस्या से मुख्यमंत्री बेखबर! … उद्धव ठाकरे ने साधा फडणवीस पर निशाना

सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की जनता महंगाई, एलपीजी संकट और रोजमर्रा की परेशानियों से जूझ रही है, लेकिन मुख्यमंत्री तक लोगों की पीड़ा पहुंच ही नहीं रही है। यदि सरकार को जनता की समस्याओं की खबर ही नहीं है या जानबूझकर उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है तो यह राज्य के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। इन शब्दों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर सीधा निशाना साधते हुए शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने जोरदार हमला किया। इसके साथ ही महायुति सरकार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
दोनों सदन में नेता विपक्ष नहीं
हर साल की तरह इस बार भी अधिवेशन में दोनों सदनों में विपक्ष के नेता नहीं हैं। इसलिए हर साल की तरह इस मुद्दे की याद दिलाने के लिए हमने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात की। इस संबंध में उन्होंने इस पर ध्यान देते हुए उचित कार्रवाई करने की बात कही है और हमने उनसे यही अनुरोध किया है। उन्होंने भी हर बार की तरह वही सामान्य आश्वासन दिया है। उद्धव ठाकरे ने सवाल उठाया कि आखिरकार यह सरकार विपक्ष का नेता देने से क्यों डर रही है?

एलपीजी की नहीं है कमी
तो क्यों लग रही हैं कतारें?
उद्धव ठाकरे का सरकार से सवाल

सरकार कह रही है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है तो फिर गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की कतारें क्यों दिखाई दे रही हैं? केवल मुंबई में ही ३० से ४० प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं और कई अन्य बंद होने के कगार पर हैं। अगर इन सब कारणों से जनता परेशान हो रही है और मुख्यमंत्री तक जनता की पीड़ा नहीं पहुंच रही है तो यह स्पष्ट है कि उनकी व्यवस्था दोषपूर्ण है। अगर मुख्यमंत्री को जनता की तकलीफ समझ में ही नहीं आ रही है या समझकर भी वे उसकी अनदेखी कर रहे हैं तो राज्य का भविष्य कठिन हो सकता है। यह बात कल शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने मीडिया से बातचीत के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के बजाय सरकार को कमी और महंगाई की समस्या को समझना चाहिए। अगर कमी नहीं है तो एजेंसियों के बाहर कतारें क्यों लग रही हैं और कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? इसका सरकार को अध्ययन करना चाहिए।
‘धर्मांतरण विरोधी विधेयक को हमारा समर्थन है’
धर्मांतरण से संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किया गया है और अब इसे विधान परिषद में पेश किया जाएगा। हमने इसका मसौदा देखा है। धर्म की स्वतंत्रता हर व्यक्ति को मिलनी ही चाहिए। यदि कोई किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर, जोर-जबरदस्ती से या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराता है तो उसका हम विरोध करते हैं। इसलिए इस विधेयक को हमारा समर्थन है। हालांकि, जनता के लिए इसमें उठने वाले कुछ सवालों के जवाब मिलना जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में धर्म परिवर्तन की घटनाओं में वृद्धि हुई है। यदि देश और भाजपा शासित कई राज्यों में धर्म परिवर्तन के मामलों में बढ़ोतरी हुई है तो यह असफलता किसकी है। इसकी जानकारी देना जरूरी है।

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