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प्राकृतिक नवचेतना का प्रतीक है विक्रमी संवत – जितेंद्रानंद

•नवसंवत्सर पर राष्ट्र चिंतन व विराट कवि सम्मेलन… जुटे प्रख्यात कवि

सामना संवाददाता/सुल्तानपुर

हिन्दू नववर्ष विक्रमी २०८३ की पूर्व संध्या पर रामनरेश त्रिपाठी सभागार में भारतीय नववर्ष आयोजन समिति द्वारा आयोजित 14 वें भव्य कवि सम्मेलन में गीत और गजलों की मधुर प्रस्तुति ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि तालियों की गूंज लगातार सुनाई देती रही। कवि जमुना प्रसाद उपाध्याय की अध्यक्षता व बाराबंकी से पधारे राम किशोर त्रिपाठी के संचालन में कार्यक्रम का श्रीगणेश किया जबलपुर से आई कवियत्री मणिका दूबे ने। उन्होने सरस्वती वंदना की। इसके बाद कवियों ने एक के बाद एक गीत, गजल, हास्य और वीररस की रचनाएं प्रस्तुत कीं। बाराबंकी से आए हास्य कवि विकास बौखल ने सुनाया.. ‘किसी खंजर से ना तलवार से जोड़ा जाए,
सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए। ये किसी शख्स को दोबारा ना मिलने पाए,प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए’। लखनऊ से आए ओजस्वी कवि अभय निर्भीक ने ‘इसका वैभव सदियों से है‌ बिखराता नित नई छटा,इसे मिटाने वाले मिट गए किन्तु सनातन नही मिटा’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बिहार से आए हास्य व्यंग के कवि शंभू शिखर ने ‘मनहूस से चेहरों को सदा डांटता हूं मैं।गम की बदलियों में भी खुशी छांटता हूं मैं’ व जबलपुर से आई गीतकार मणिका दूबे ने ‘वजूद धागे सा टूट जाना सही नहीं है। अनापरस्तों से दिल लगाना ठीक नहीं है।।’ सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी ।। कोटा से आए गीत व गजलकार कुंवर जावेद ने ‘हर एक तख्त से हर ताज से लड़ जाती है’ कोई भी राज हो हर राज से लड़ जाती है’।हमारे देश की बेटी को कितना जानते हो।सुहाग के लिए यमराज से लड़ जाती है’ सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। रायपुर छत्तीसगढ़ से पधारे गीतकार रमेश बिस्वहार ,अयोध्या से आए ध्रुव उपाध्याय ने कवि सम्मेलन में गीत-गजलों से समां बांधा।‍ इसके पहले कार्यक्रम के पहले सत्र का शुभारंभ मुख्य वक्ता महासचिव,अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती
व कार्यक्रम संयोजक पालिकाध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल ने मंचासीन अतिथियों के साथ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया।कवि सम्मेलन के पहले सत्र को संबोधित करते हुए स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भारतीय काल गणना,भारतीय नववर्ष की महत्ता और प्रकृति में होने वाले परिवर्तन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा हिन्दू नववर्ष केवल एक तिथि परिवर्तन नहीं,बल्कि प्राकृतिक और सांस्कृतिक नवचेतना का प्रतीक है।कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग संघचालक डॉ एके सिंह व संचालन डॉ प्रीति प्रकाश ने किया।नगर पालिकाध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल ने जनपद वासियों से भारतीय नववर्ष को धूमधाम व उत्साह के साथ मनाने का आह्वान किया। उन्होंने आएं हुए सभी अतिथियों,कवियों व श्रोताओं का धन्यवाद व आभार प्रकट किया।कवि सम्मेलन में भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी,डॉ एमपी सिंह, विभाग प्रचारक श्रीप्रकाश, जिला प्रचारक आशीष,रामचन्द्र मिश्र,एमएलसी शैलेन्द्र प्रताप सिंह,विधायक राजबाबू उपाध्याय,बार अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह,जगजीत सिंह छंगू,ओम प्रकाश पाण्डेय,ऋषिकेश ओझा,डॉ सीताशरण त्रिपाठी,करूणा शंकर द्विवेदी,नागेन्द्र सिंह एडवोकेट,विजय सिंह रघुवंशी शिव कुमार सिंह,संजय सोमवंशी,विनोद कुमार पाण्डेय, दिनेश चौरसिया,सुजीत सिंह मनीष जायसवाल, हनुमान त्रिपाठी समेत सैकड़ों की संख्या में मौजूद श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन किया।देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन में साहित्य प्रेमियों की भारी भीड़ देखने को मिली और हर प्रस्तुति को भरपूर सराहना मिली।

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