सूरज सिंह
छोटा राजन का दायां हाथ माने जाने वाले ओ.पी. सिंह की वर्ष २००२ में नासिक जेल में हत्या कर दी गई थी। हालांकि यह घटना नासिक जेल में घटी, लेकिन अपराध जगत के सूत्रों के अनुसार उसकी हत्या का निर्णय पहले ही आर्थर रोड जेल के भीतर लिया जा चुका था।
बताया जाता है कि वर्ष २००१ के दौरान गिरोह के सदस्य बालूढोकरे सहित छोटा राजन गिरोह के बड़े-बड़े सूरमा भी आर्थर रोड जेल मे बंद थे। छोटा राजन को किसी ने यह जानकारी दी की ओ.पी. सिंह गिरोह के लोगों को भड़का कर अलग गुट बनाने की कोशिश कर रहा है। इस पर छोटा राजन ने बालू ढोकरे को जेल का जायजा लेने के लिए फोन किया और नाना यानी छोटा राजन ने बालू को पूछा की ओ पी सिंह वैâसा है और क्या कर रहा है। राजन को उसकी जानकारी दी गई। नाना ने बालू को फिर दुबारा फोन किया और बोला ओ पी को लाइन पर ले। यहां यह बताना जरुरी है। छोटा राजन को यह भी पता चला की ओ.पी. सिंह उसके खिलाफ अपमानजनक बातें कर रहा है।
अपराध जगत में ‘नाना’ के नाम से पहचाने जाने वाले राजन के लिए यह अस्वीकार्य था, और यहीं से उसके खिलाफ मौत का फरमान जारी होने की भूमिका तैयार हुई। तो नाना ने बालू को बोला, `ओ पी को लाइन पर लो क्ंयूिक ओ पी और बालू ढोकरे अच्छे दोस्त थे इसलिए ओ पी कोई टेंशन न लेकर बात करने लगा। उसी कॉन्प्रâेंस कॉल मे नाना भी जुड़ा है, यह उसे पता नहीं था।
बातचीत के दौरान ओ.पी. सिंह को यह पता नहीं था कि छोटा राजन भी लाइन पर जुड़ा हुआ है। इसी दौरान उसने राजन के लिए अपमानजनक शब्द कह दिए, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। अब नाना ने बालू को फोन कर कहा ओ पी को गोली दे दो। उसी दौरान जेल में बंद एक वैâदी के मुताबिक, नाना को समझ आ गया कि ओपी सिंह का गेम होना जरूरी नजर आन लगा और एक प्लान बना।
इसके बाद राजन के एक करीबी सहयोगी प्रकाश जैरे को कोल्हापुर जेल से स्थानांतरित कर आर्थर रोड जेल लाया गया उसी दौरान नाना ने बालू को फिर फोन किया और, बोला ओ पी को गोली दे दो, इस गोली का मतलब नाना की टीम अच्छी तरह जानती थीं आरोप है कि उसे ओ.पी. सिंह को खत्म करने का निर्देश दिया गया था। कहा जाता है कि योजना के तहत उसे जहर या गोली देने की व्यवस्था की गई, प्रकाश को उस पानी के ग्लास मे गोली डालनी थी लेकिन अंतिम क्षणों में वह डर गया और योजना पूरी नहीं हो सकी।
इन घटनाओं के बाद ओ.पी. सिंह को अपनी जान को खतरा महसूस होने लगा। उसे शक हो गया कि गिरोह के भीतर अब उसकी जगह सुरक्षित नहीं रही है। इसके बाद उसने अपने प्रयासों से आर्थर रोड जेल से नासिक जेल स्थानांतरण करवाया। लेकिन नासिक जेल मे भी वह बच नहीं पाया। नाना के तकरीबन १२ लोगों को आर्थर रोड जेल से नासिक ट्रांसफर किया गया और नाना की टीम ने ओ पी सिंह की हत्या कर दी
वर्ष २००२ में नासिक जेल के भीतर उसकी हत्या कर दी गई। अपराध जगत के जानकारों के अनुसार, यह मामला दर्शाता है कि गैंगवॉर और आपसी रंजिशें जेल की दीवारों के भीतर भी जारी रहती हैं और कई बार वहीं बैठकर मौत के पैâसले लिखे जाते हैं।
