अनिल तिवारी
झूठ की उम्र कम नहीं होती। आप दिन को चाहे जितनी ही बार रात कहें वो रात नहीं हो जाता। भाजपा के साथ भी पिछले एक दशक से यही हो रहा है। उनकी प्रोपेगेंडा मशीन दिन-रात नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का राजनैतिक करियर तबाह करने का प्रयास करती रही, पर हर बार राहुल अग्निपरीक्षा में और निखर कर ही बाहर आए हैं। पहले भाजपा ने पूरी ताकत के साथ राहुल गांधी को `पप्पू’ साबित करने का प्रयास किया। हजारों करोड़ रुपए राहुल की छवि खराब करने और उन्हें बेअकल साबित करने पर खर्च कर दिए गए, पर राहुल हर बार एक बुद्धिमान और सजग राजनीतिज्ञ के तौरपर उभर कर सामने आए। फिर राहुल को घोटालों में फंसाकर उनका राजनैतिक करियर तबाह करने का प्रयास हुआ। ईडी जैसी बे-लगाम एजेंसियों को उनके पीछे लगा दिया गया। नतीजा अभी भी अधर में ही है। इस बीच उनकी सांसदी खत्म करने के पुरजोर प्रयास हुए, पर आखिर कोर्ट को भी यह अन्यायपूर्ण लगा। तब `कांग्रेस मुक्त भारत’ बनाने की मुहिम चलाई गई। हालांकि, जनता ने कांग्रेस को और मजबूत ही किया। राहुल की भारत जोड़ो यात्रा ने भाजपा के हर बार होश उड़ाए। राहुल की युवा टीम को बरगलाकर उनकी शक्ति कम करने का प्रयास हुआ, परंतु राहुल तब भी हताश नहीं हुए तो अब दांव उनके चचेरे भाई पर चला जा रहा है। वरुण गांधी को अहमियत दी जा रही है, उस वरुण गांधी को जिनका राजनैतिक करियर नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालते ही हाशिए पर चला गया था।
खीझ में कई बार वरुण ने अपनी ही सरकार पर तंज कसे थे, अब उन्हीं वरुण गांधी पर अचानक से भाजपा का प्रेम बरसने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरुण से एक आत्मीय मुलाकात की है, उनके पूरे परिवार से भेंट की है। उसका बाकायदा फोटोशूट भी हुआ है और यह दर्शाने का प्रयास भी कि गांधी परिवार भी हमारे साथ है। हम गांधी से ही गांधी का कांटा निकालेंगे। परंतु जनता को बिलकुल नहीं लगता कि `नई भाजपा’ की यह नई चाल भी कामयाब हो पाएगी। `मिशन वरुण’ भी फेल ही होगा, जिस तरह पहले के सभी मिशन फेल हुए हैं। राहुल की आवाज संसद में भले बंद करा दी जाए, पर सड़क पर उनकी बुलंदी बरकरार रहेगी। जनता में उनकी साख बढ़ती रहेगी और वो बढ़ भी रही है, ये तो होना ही था। एक न एक दिन वरुण गांधी को राहुल गांधी के खिलाफ मोहरा बनाकर मैदान में उतारा जाना ही था। पीएम मोदी से वरुण की ये मुलाकात शायद उसी मुहिम की पहली कड़ी है।
