मुख्यपृष्ठग्लैमरहम दोनों की सोच काफी मिलती है!-आदित्य धर

हम दोनों की सोच काफी मिलती है!-आदित्य धर

वास्तविकता से जुड़ी फिल्में बनानेवाले आदित्य धर को अपनी पहली ही फिल्म ‘उरी द सर्जिकल स्ट्राइक’ के लिए न केवल ‘फिल्मफेयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया, बल्कि कई पुरस्कारों के साथ ही वे ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’ के भी हकदार बन गए। अपनी डेब्यू फिल्म ‘उरी…’ के सफल होने के बाद आदित्य धर की ‘आर्टिकल ३७०’ हाल ही में रिलीज हुई है। अभिनेत्री यामी गौतम से विवाह करनेवाले आदित्य धर जल्द ही पिता बनने वाले हैं। पेश है, आदित्य धर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
‘आर्टिकल ३७०’ का निर्माण किस प्रेरणा से हुआ?
फिल्म ‘आर्टिकल ३७०’ कश्मीर की तरफ इशारा करती है। मैं कश्मीर से हूं और स्वर्ग से सुंदर इस प्रदेश की रग-रग से वाकिफ हूं। कश्मीर कई मुश्किलों से गुजरता रहा। ‘आर्टिकल ३७०’ रद्द होने के बाद महसूस हुआ जैसे कश्मीर को स्वतंत्रता मिली और कश्मीर ने खुली हवा में सांस ली। जब से मैंने होश संभाला एक मुद्दत से मैं इस विषय पर लिखना और फिल्म बनाना चाहता था। हालांकि, इस फिल्म को निर्देशित किया आदित्य जांभले ने। उनके काम पर हम सभी को गर्व है।
फिल्म की शुरुआत कैसे हुई?
मैं अपनी दूसरी फिल्म ‘इम्मॉर्टल अश्वत्थामा’ में व्यस्त था। मुझे ‘अश्वत्थामा’ को थोड़ा सा रोकना पड़ा क्योंकि इस फिल्म के लिए मुझे जिस तरह के डिजिटल इफेक्ट्स की जरूरत थी, उसका इंतजाम नहीं हो पाया तो मैंने इस फिल्म को होल्ड पर रख दिया और दिलो-दिमाग पर छाई फिल्म ‘आर्टिकल ३७०’ पर मैंने फिल्म बनानी शुरू कर दी। फिल्म का विषय इतिहास और यथार्थ से जुड़ा है। मैंने खुद गहरा रिसर्च किया। मेरी कोशिश थी कि कोई भी पहलू अछूता न रह जाए और कुछ गलत न दिखाया जाए। ‘आर्टिकल ३७०’ के लिए जो योजनाएं बनाई गईं वो सीक्रेटली बनीं और इससे जुड़े एक भी आदमी ने इस योजना के बारे में अपना मुंह नहीं खोला।
फिल्म को बनाते समय आपने यामी के अलावा किसी बड़े स्टार्स को नहीं लिया?
मैं फिल्म बनाता हूं प्रोजेक्ट नहीं। कोशिश करता हूं कि दर्शकों के सामने रियलिटी पर आधारित फिल्म पेश करूं, जो डॉक्यूमेंट्री न होकर मनोरंजन भी दे। एंटेरटेनिंग होकर भी सच्चाई का साथ न छोड़े। सेंसेटिव हों लेकिन जबरदस्ती की सेंसेशनल नहीं। मेरी फिल्म में कहानी हो, आत्मा हो और प्रतिभाशाली कलाकार हो। मैं धारा से परे चलनेवाला मेकर हूं। मेरी फिल्म में ग्लैमर या बड़े स्टार्स की जरूरत नहीं। यामी, प्रियामणि, किरण करमरकर, अरुण गोविल, राज जुत्शी, वैभव तत्ववादी जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों का नेचुरल अभिनय फिल्म की जान है। मेरी डेब्यू फिल्म ‘उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक’ में यामी और विकी कौशल, कीर्ति कुल्हारी, परेश रावल, मोहित रैना जैसे उम्दा कलाकार थे। भविष्य में अगर मुझे बड़े स्टार्स की जरूरत महसूस होगी तो मैं उन्हें कास्ट कर सकता हूं। फिलहाल मुझे ऐसी जरूरत नहीं पड़ी।
फिल्म ‘आर्टिकल ३७०’ की शूटिंग के दौरान आपको किन परेशानियों का सामना करना पड़ा?
अमूमन मैं रियल लोकेशन पर शूटिंग करने की कोशिश करता हूं। मेरी कहानियां वास्तविक होती हैं। कभी खराब मौसम के कारण समझौते करने पड़े वो अलग बात है। किसी फिल्मी परिवार में जन्म लेकर मैं यहां नहीं आया। हम जैसे सर्वसामान्य मिडिल क्लास लोगों की जिंदगी में एक नहीं कई मुश्किलें आती हैं और जब मुश्किलें आती हैं तो उन मुश्किलों को मात देने के लिए दिमाग डबल चलता है, यह मेरा अनुभव है।
क्या फिल्म का टायटल आपको आसानी से मिल गया?
फिल्म का यही शीर्षक मैंने सोचा था लेकिन बाद में पता चला यह शीर्षक आनंद पंडित के पास है। मैंने उनसे संपर्क किया और उन्होंने खुशी-खुशी यह टायटल हमें दे दिया।
डेब्यू फिल्म में ही नेशनल के साथ ही राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद ‘आर्टिकल ३७०’ के निर्माण के दौरान कितना प्रेशर रहा?
अगर मैं यह कहूं कि मुझ पर राष्ट्रीय पुरस्कारों का कोई प्रेशर नहीं या कोई स्ट्रेस नहीं था तो मैं गलत बोल रहा हूं। राष्ट्रीय पुरस्कार पाना एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिससे देशवासियों के प्रति आपकी एक नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है। राष्ट्रीय पुरस्कार पाने का मतलब है आप देश को रिप्रेजेंट करते हैं। फिल्मों का बॉक्स ऑफिस सक्सेस हर मेकर के लिए मायने रखता है लेकिन सिर्फ मुनाफा कमाना मेरा उद्देश्य कभी नहीं रहा।
एक अभिनेत्री और पत्नी के रूप में यामी गौतम कैसी हैं?
फिल्म ‘उरी’ ने मुझे बॉक्स ऑफिस पर सफलता दिलाने के साथ ही राष्ट्रीय सहित अन्य पुरस्कार दिए। मेरा स्ट्रगल थमा और मैंने अपने बड़े भाई लोकेश धर के साथ ‘६२ स्टुडिओज’ की स्थापना की। मेरी खुशियों में चार चांद लग गए जब यामी जैसी अभिनेत्री के साथ मेरा विवाह हुआ। यामी बेहद अच्छी और नेचुरल अभिनेत्री हैं। एक पढ़े-लिखे परिवार की यामी बहुत ही सुलझी हुई हैं। यामी में कमाल की अंडर स्टैंडिंग है। हम दोनों की सोच काफी मिलती है। इसका एक कारण यह भी है कि हम दोनों मटेरियलिस्टिक दुनिया और चीजों से दूर ही रहते हैं। ‘उरी’ ने मुझे सब कुछ दिया लेकिन मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे यामी मिली, ठीक ‘उरी’ के दौरान।

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