मुख्यपृष्ठनए समाचारशिंदे के गृह जिले में निधि का अभाव...अब तक नहीं बनी स्मार्ट...

शिंदे के गृह जिले में निधि का अभाव…अब तक नहीं बनी स्मार्ट सिटी!

-अधर में लटकी तीन परियोजनाएं

सामना संवाददाता / मुंबई

उप मुख्यमत्री एकनाथ शिंदे के जिले ठाणे में ठाणे-मुलुंड स्टेशन के बीच विस्तार किए जा रहे नए ठाणे स्टेशन, कोपरी सैटीस और शहर की पानी की टंकी के विकास कार्य में विलंब की बात सामने आई है। ठाणे में तीन महत्वपूर्ण बड़ी परियोजनाएं जिनका काफी शोर मचा हुआ था, रुकी हुई हैं। इस बीच, ढाई साल बाद भी ठाणे स्मार्ट सिटी का काम पूरा नहीं हुआ। तकनीकी कारणों, बाधाओं और निधि की कमी के कारण परियोजनाएं अटकी हुई हैं।
बता दें कि ठाणे स्मार्ट सिटी योजना में अधिकांश परियोजनाओं का काम शुरू से ही धीमी गति से चलने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि २०२५ के अंत तक सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे, लेकिन ऐसा दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि महत्वपूर्ण परियोजनाओं में प्रशासन का दावा है कि गावदेवी भूमिगत पार्किंग, जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार, खाड़ी किनारे का विकास, नागला बंदरगाह, वाटरफ्रंट विकास जैसी परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ कार्य अंतिम चरण में हैं। इस बीच, विस्तारित रेलवे स्टेशन और पूर्वी सैटीस जैसे महत्वपूर्ण कार्य जो परिवहन की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होंगे, बेहद धीमी गति से चल रहे हैं।
९० प्रतिशत धनराशि खर्च
ठाणे मनपा को स्मार्ट सिटी में शामिल किए जाने के बाद मनपा के माध्यम से विभिन्न परियोजनाएं शुरू की गई हैं। तदनुसार, विभिन्न परियोजनाओं के लिए १०५०.३७ करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इस बीच, केंद्र सरकार, राज्य सरकार और ठाणे मनपा के माध्यम से धनराशि खर्च की जा रही है। मनपा का दावा है कि वास्तविक कार्य ८० प्रतिशत हो चुका है।
भाजपा की आपत्तियों की अनदेखी
ठाणे शहर भाजपा ने केंद्र सरकार के ५० प्रतिशत धन से क्रियान्वित स्मार्ट सिटी योजना के कार्यों में अनियमितताओं की कई बार शिकायत की है और कहा है कि अधिकांश कार्य धीमी गति से किए जा रहे हैं। साथ ही, भाजपा ने स्मार्ट सिटी के माध्यम से होने वाले प्रशासनिक खर्चों पर भी आपत्ति जताई थी और इसके प्रमाण भी दिए थे, लेकिन ऐसा देखा गया कि इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

अन्य समाचार