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वाह रे मोदी सरकार…वाह रे चुनाव आयोग…!..नेताजी के परिवार से भी मांग डाले नागरिकता के सबूत!.. आजादी के नायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस के पौत्र को भी करना पड़ा एसआईआर सुनवाई का सामना

सामना संवाददाता / कोलकाता

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय चुनाव आयोग के कारनामों की खबरें आए दिन अखबारों की सुर्खियां बनती हैं। अब इसी कड़ी में मोदी सरकार और चुनाव आयोग का एक और कारनामा सामने आया है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान आजादी के नायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परिवार को भी नहीं बख्शा गया है। आजादी के नायक के पौत्र को एसआईआर हियरिंग का सामना करना पड़ा है। यही नहीं चुनाव आयोग के सामने उनके पौत्र चंद्र कुमार बोस को अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ी है। सबसे आश्चर्य जनक बात यह है कि साक्ष्य के तौर पर आधार कार्ड या पैन कार्ड एक्सेप्ट नहीं किया गया। चुनाव आयोग की इस कार्यशैली से चंद्र कुमार बोस काफी आहत हैं।
बताया जाता है कि नेताजी के परिवार को एसआईआर हियरिंग का सामना करना पड़ा। नेताजी के पौत्र चंद्र कुमार बोस ने पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर को ‘हैरेसमेंट’ का आरोप लगाया है। हालांकि, चंद्र कुमार बोस का नाम २००२ की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) लिस्ट में था, लेकिन बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को बीएलओ ऐप पर डिटेल्स के लिए एन्यूमरेशन फॉर्म अपलोड करने के बाद ही उनका नाम मिला। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के पोते, उनकी पत्नी उषा बोस और बेटी १६ जनवरी को हियरिंग के लिए पेश हुए, साथ ही उनके दो बेटों की तरफ से भी पेश हुए जो कोलकाता से बाहर रहते हैं।
बुलाने की नहीं बताई सही वजह
चंद्र बोस ने कहा कि उन्होंने कोई सही वजह नहीं बताई। मैंने हियरिंग के लिए वहां मौजूद व्यक्ति से पूछा। उसने कुछ लिंकेज प्रॉब्लम बताई। लिंकेज उन्हें करना है, मुझे नहीं। हालांकि, पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग का कहना है कि बोस को हियरिंग के लिए इसलिए बुलाया गया था, क्योंकि प्रोजेनी लिंकेज कॉलम खाली छोड़ दिया गया था। उधर चंद्र कुमार बोस ने कहा कि मुझसे इसे खाली छोड़ने के लिए कहा गया। बाद में जब हमने फॉर्म जमा किया तो उसने कहा कि उसे मेरा नाम मिल गया है, लेकिन मुझे हियरिंग के लिए बुलाया जा सकता है और मुझे अपना पासपोर्ट दिखाना होगा और यह हो जाएगा।
अब सुभाषचंद्र बोस के  पौत्र ने एसआईआर पर उठाए सवाल
एसआईआर को लेकर चंद्र कुमार बोस ने यह भी कहा कि अगर आधार कार्ड या पैन कार्ड एक्सेप्ट नहीं किया जाता है तो केंद्र अपने ही पहचान के डॉक्यूमेंट जारी करने के सिस्टम पर शक कर रहा है।
घुसपैठ और एसआईआर करने के मुख्य मिशन के बारे में बात करते हुए बोस पूछते हैं कि आप शायद कुछ नकली वोटरों के लिए १० करोड़ लोगों को परेशान कर रहे हैं। घुसपैठिए और हजारों-लाखों रोहिंग्या कहां हैं? मुझे वे नहीं दिख रहे हैं। जबकि बोस का कहना है कि उनका नाम २००२ की लिस्ट में है, उनकी पत्नी और बच्चों का नाम लिस्ट में नहीं है क्योंकि उन्होंने उस समय वोट नहीं दिया था। ‘आवश्यक दस्तावेज जमा करने पर हमें सुनवाई के लिए बुलाया’ बोस ने दावा किया कि उन्होंने और उनके परिवार के सदस्यों ने अपने जनगणना प्रपत्रों के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया, ‘फिर भी हमें सुनवाई के लिए बुलाया गया। इसका कारण बेहद चौंकानेवाला था, क्योंकि मतदान अधिकारियों ने कहा कि डेटा को जोड़ने में समस्या थी। मैं इसलिए शिकायत नहीं कर रहा हूं कि मुझे एसआईआर के लिए बुलाया गया था, बल्कि इसलिए कर रहा हूं, क्योंकि पूरी प्रक्रिया अव्यवस्थित और बिना किसी स्पष्टता के है।

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