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दिल्ली लाइव : ईरान ने निकाल दिया ट्रंप का `तेल’… कीमत अदा कर रही है दुनिया

अरुण कुमार गुप्ता

मार्च २०२६ में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल १०० से ११० डॉलर के ऊपर पहुंच गई हैं, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित किया है, जिससे प्रतिदिन १० से १४ मिलियन बैरल का संभावित तेल संकट पैदा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान के खार्ग द्वीप तेल हब पर हमलों के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया है और यह लगातार १०० डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। खाड़ी में इस संघर्ष के कारण दुनिया में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिससे ऊर्जा की कीमतों में आई तेजी के कारण दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तेल नीतियों और मध्य पूर्व में उनके सैन्य हस्तक्षेप के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। उधर ईरान पर हमलों के जवाब में तेहरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कतर के रास लफ्फान गैस हब पर हमले के बाद भारी नुकसान हुआ, जिससे वैश्विक गैस संकट का खतरा बढ़ गया है। तेल और गैस के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं और एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो लंबा ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। यानी एक तरह से कहा जाए कि इस युद्ध में ईरान ने ट्रंप का ‘तेल’ निकाल दिया है और कीमत पूरी दुनिया अदा कर रही है।
मोदी के निकम्मे सांसद!
प्रधानसेवक यानी नरेंद्र मोदी के दम पर बिहार के कुछ ऐसे सांसद हैं जिन्हें आसानी से जीत हासिल हो जाती है। कई सांसद ऐसे भी हैं, जो पिछले ११ साल से जीत रहे हैं, लेकिन अब तक अपने क्षेत्र के सभी गांवों में भी नहीं जा पाए हैं। ये सभी सांसद सोचते हैं कि जब आसानी से जीत हासिल हो ही जाती है तो फिर क्यों बेकार में विकास कार्यों के चक्कर में पड़ा जाए। अपने लोकसभा क्षेत्रों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त कराने के लिए हर सांसद को ५-५ करोड़ रुपए का फंड जारी किया जा चुका है, लेकिन बिहार के ६ सांसदों के रिपोर्ट कार्ड में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। इन लोगों ने अपनी निधि का एक रुपया भी खर्च नहीं किया है। इसका मतलब तो यह हुआ कि या तो इन लोगों ने अपने लोकसभा क्षेत्रों को स्विट्जरलैंड बना दिया है या फिर इनके पास अपने क्षेत्रों को विकसित करने को लेकर कोई विजन नहीं है। इन सांसदों में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी, बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी, डॉ. संजय जायसवाल और विवेक ठाकुर शामिल हैं। २ साल में इन लोगों ने अपने क्षेत्र में ढेला बराबर भी काम नहीं करवाया है। मतलब एक रुपए भी खर्च नहीं किया है। न ही विकास की कोई योजना पेश कर पाए हैं। इसका मतलब तो यह भी हुआ कि ये सांसद पूरी तरह से ‘नॉन परफॉर्मर’ साबित हुए हैं।
गैस की किल्लत, चूल्हे पर पकाओ खाना!
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण पूरी दुनिया में उर्जा सप्लाई बाधित हुई है। इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर एलपीजी यानी रसोई गैस पर पड़ा है। पूरे देश में रसोई गैस को लेकर मचे हाहाकार की खबरें आ रही हैं, लेकिन हमारे प्रधानसेवक मोदी जी हैं, जिन्हें कुछ पता ही नहीं है। बंदा देश के पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त है। देश के लोग परेशान हैं तो परेशान होते रहें। हो सकता है अंधभक्त कल यह सलाह देने लगें कि देश में गैस की किल्लत है तो चूल्हे पर खाना पकाओ और उसके फायदे भी गिनाने लगेंगे। प्रधानसेवक ने यदि ईरान से अच्छे संबंध बरकरार रखे होते तो शायद यह दिन देखने को नहीं मिलते, लेकिन अमेरिकी, इजरायल और ईरान युद्ध के दो दिन पहले हमारे प्रधानसेवक चमकेशगीरी करने इजरायल चले गए। इजरायल जाकर क्या मिला, इरान से संबंध खराब हुए। नहीं तो शायद आज देश के लोगों को रसोई गैस की लाइन में नहीं लगना पड़ता। यही नहीं, हमारे प्रधानसेवक हमारे सदियों पुराने सहयोगी और मित्र रूस से भी किनारा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति की गोद में जाकर बैठ गए। लेकिन एक बात जो समझ में नहीं आती है वह यह कि रुस को छोड़ आखिर प्रधानसेवक ट्रंप के सामने क्यों सरेंडर हो गए हैं। इसमें जरूर कोई गहरा राज छिपा है। जो अमेरिका अपने आप को सुपर पावर कहता है आज उसी सुपर पावर का ईरान ने तेल निकाल दिया है। तो एसे सुपर पावर की प्रधानसेवक को जरुरत क्या है?

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