मुख्यपृष्ठस्तंभस्कैम्स एंड स्कैंडल्स :  कड़वी यादों को भुलाना चाहती थीं डायना!

स्कैम्स एंड स्कैंडल्स :  कड़वी यादों को भुलाना चाहती थीं डायना!

श्रीकिशोर शाही

(एक परी कथा का अंत–१४)

१९९६ के तलाक के बाद डायना का जीवन एक नए मोड़ पर आ गया। अब वह औपचारिक रूप से राज परिवार की सक्रिय सदस्य नहीं थीं, लेकिन जनता की नजरों में उनकी पहचान पहले से अधिक स्पष्ट हो गई थी। ‘डायना, प्रिंसेस ऑफ वेल्स’ के रूप में उनका नाम अब केवल राज परिवार से जुड़ा पद नहीं था, बल्कि एक स्वतंत्र सार्वजनिक व्यक्तित्व बन चुका था। कहा जाता है कि डायना ने खुद को तमाम तरह के सामाजिक कार्यक्रमों में समर्पित कर दिया ताकि वे राजमहल में बिताए उन कड़वी यादों को भूल जाएं। शायद उन्हें इसमें कुछ हद तक सफलता भी मिली। मगर पता नहीं क्यों, प्रिंस चार्ल्स को यह सब अच्छा नहीं लगता था। जानकारों का मानना है कि पत्नी की लोकप्रियता ने शायद पति के अहम को ठेस पहुंचाई थी। अब असल बात क्या है यह तो प्रिंस चार्ल्स को ही मालूम था। अगर ऐसी बात थी तो एक खूबसूरत परिवार इस अहम की आग में जल चुका था।
बहरहाल, तलाक के बाद डायना जिन अभियानों से जुड़ीं, उन्हें अधिक गंभीरता से लिया। उनका ध्यान मानवीय मुद्दों पर केंद्रित होने लगा। अस्पतालों के दौरे, एड्स रोगियों के साथ मुलाकातें और सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रम, इन सबमें उनकी उपस्थिति लगातार दिखाई देने लगी। इसी दौर में उन्होंने लैंडमाइन विरोधी अभियान में सक्रिय भागीदारी शुरू की। जनवरी १९९७ में वह अप्रâीकी देश अंगोला पहुंचीं, जहां गृहयुद्ध के बाद बिछी बारूदी सुरंगों के कारण बड़ी संख्या में लोग घायल हो रहे थे। सुरक्षात्मक जैकेट और हेलमेट पहनकर उन्होंने उस क्षेत्र का दौरा किया। यह दृश्य दुनिया भर के समाचार चैनलों पर प्रसारित हुआ। डायना की इस पहल ने अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। मानवीय संगठनों ने उनके समर्थन को महत्वपूर्ण माना, क्योंकि इससे लैंडमाइन के मुद्दे पर वैश्विक चर्चा तेज हुई। उनके लिए यह केवल औपचारिक यात्रा नहीं थी, वह पीड़ितों से सीधे मिलतीं, उनकी कहानियां सुनतीं और सार्वजनिक रूप से इस समस्या पर बोलतीं। तलाक के बाद का यह समय डायना के व्यक्तित्व के दूसरे पहलू को सामने लाने लगा। राजसी औपचारिकता से बाहर वह अधिक स्वतंत्र दिखाई देती थीं। जनता के साथ उनका संबंध पहले से अधिक गहरा हो गया था। लेकिन यह नया अध्याय लंबा चलने वाला नहीं था। कुछ ही महीनों में उनके जीवन की दिशा एक और अप्रत्याशित मोड़ लेने वाली थी।
(शेष अगले अंक में)

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