सामना संवाददाता / मुंबई
पोक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार ७६ वर्षीय बुजुर्ग को अदालत ने सबूतों के अभाव के चलते बरी कर दिया है। बुजुर्ग पर उसी की इमारत में रहनेवाली १० साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ और किस करने का आरोप था।
अगस्त २०१९ में वर्ली इलाके में रहने वाली १० साल की बच्ची ग्राउंड फ्लोर से दूसरी मंजिल जाने के लिए लिफ्ट में गई थी, तभी उसी इमारत के रहने वाला ७६ साल का बुजुर्ग लिफ्ट में घुसा और बच्ची के साथ छेड़छाड़ कर उसे किस किया। पीड़िता द्वारा आपबीती सुनाने के बाद मां ने वर्ली पुलिस स्टेशन में जाकर बुजुर्ग के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बुजुर्ग को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। ६ साल तक चले केस के अंतिम पैâसले में कोर्ट ने आरोपी को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया है।
व्यक्तिगत लड़ाई का खामियाजा
कोर्ट ने अपने पैâसले में कहा कि पीड़िता ने घटना के बारे में किसी को बताने में बहुत समय लिया और उसके बयान का समर्थन करने के लिए कोई अन्य गवाह या सबूत नहीं है। इसके विपरीत, बचाव पक्ष एक स्पष्ट और सुसंगत घटनाक्रम प्रस्तुत करता है, जिसे मेडिकल रिकॉर्ड और गवाहों के बयान के दौरान स्वीकार किए गए तथ्यों से समर्थन मिलता है। इन बिंदुओं को एक साथ देखने पर, अभियोजन की कहानी पर गंभीर संदेह पैदा होता है और बचाव पक्ष के इस दावे का समर्थन होता है कि आरोपी को व्यक्तिगत लड़ाई के कारण झूठा फंसाया गया था। इस उचित संदेह के आधार पर कोर्ट ने उस व्यक्ति को बरी कर दिया।
