मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड: आसमान की तरफ ताकती मिसाइलें और रॉकेट!

मुस्लिम वर्ल्ड: आसमान की तरफ ताकती मिसाइलें और रॉकेट!

सूफी खान

सऊदी में कैसे मनाई गई ईदउल अजहा?

५० डिग्री की तेज गरमी में हज के अरकान मक्का से मिना तक और अराफात के पहाड़ों से मदीना तक जारी रहे। मिडिल ईस्ट में जंग के इस मौजूदा दौर में इस साल का हज, पिछले सालों से कुछ अलग भी रहा। जहां एक तरफ लोग सुकून से अपने दीनी फराइज यानी कर्तव्यों को पूरा कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ आसमान की ओर मुंह किए एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात थे।
अमेरिकी एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम थाड़ के सेंसर हर उस चीज को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो आसमान की तरफ से कभी भी गिर सकते हैं। कब किसी दुश्मन की मिसाइल या रॉकेट सऊदी के आसमान पर उड़ने लग जाए, खतरा बना रहता है। सऊदी डिफेंस फोर्सेस, हेलिकॉप्टरों और फाइटर जेट से आसमान की निगरानी में रहे।
४० दिनों की ईरान, अमेरिका-इजरायल जंग के बाद ये पहला मौका रहा जब मिडिल ईस्ट की धरती पर इतना बड़ा आयोजन हो रहा है। हज में इस साल दुनियाभर से २० लाख से ज्यादा मुसलमान पहुंचे थे। वहीं हज के दूसरे ही दिन होर्मुज के समंदर पर अमेरिका और ईरान की झड़प भी हो चुकी थी। ऐसे में हज की सुरक्षा बहुत बड़ा चैलेंज रही सऊदी अरब की सरकार के लिए।
सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से होने वाले किसी भी समझौते को इजरायल कभी स्वीकार नहीं करेगा। यही वजह है कि अमेरिका ने ईरान के साथ चल रही वार्ता से उसे अलग रखा है। कुछ लोग सोशल मीडिया पर ये मानते हैं कि इजरायल हज के दौरान भी फाल्स फ्लैग करवा सकता है, जिससे जंग और भड़क जाए। यही वजह है कि सऊदी ने इस साल हज के काफी पहले से ही अपनी जबरदस्त सुरक्षा तैयारी कर रखी थी।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ये भी बताती हैं कि सऊदी अरब को हमेशा ईरान की प्रॉक्सी माने जाने वाले यमन के अंसारुल्लाह से भी खतरा रहता है। साल २०१५ में यमन के हूती या अंसारुल्लाह ने सऊदी की अरामको तेल रिफायनरी पर मिसाइलें मार दी थीं। सऊदी यमन में अंसारुल्लाह को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। अंसारुल्लाह या हूती की इजरायल से भी दुश्मनी है। गाजा में इजरायल की आक्रामकता के बीच हूतियों ने लगातर इजरायल पर हमले जारी रखे थे। लेकिन कहा जा रहा है कि मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात में सिर्फ इजरायल का खतरा ज्यादा बड़ा है। इजरायल की पूरी कोशिश है कि सऊदी, यूएई, कतर, बहरीन सब जंग में शामिल हो जाएं और ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन सरकार का पूरी तरह खात्मा किया जा सके। यही वजह है कि हज में इस साल एहतियात बरती जा रही है। २७ मई को कुर्बानी के साथ हज के अरकान पूरे हो गए।

अन्य समाचार