सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई पोर्ट को अपने खून-पसीने से खड़ा करने वाले गोदी मजदूरों के लिए अब अपने घर का सपना साकार करने की मांग जोर पकड़ रही है। मुंबई पोर्ट ट्रस्ट डॉक एंड जनरल एम्प्लॉईज यूनियन ने वडाला स्थित मुंबई पोर्ट की कामगार वसाहत की उपलब्ध जमीन में से उपयुक्त भूखंड गोदी मजदूरों के आवास के लिए वाजिब दर पर देने की मांग की है।
ज्येष्ठ कामगार नेता एडवोकेट एस. के. शेट्ये, यूनियन के महासचिव सुधाकर अपराज के मार्गदर्शन में मुंबई पोर्ट प्राधिकरण के बोर्ड सदस्य एवं यूनियन के उपाध्यक्ष प्रदीप नलावडे ने यह मांग मुंबई पोर्ट प्राधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष रखी है। यह जानकारी मारुती विश्वासराव,प्रसिद्धीप्रमुख
मुंबई पूल ट्रस्ट डॉक अँड जनरल एम्प्लॉईज युनियन ने दी है
15 साल पुरानी मांग, अब पूरा हो सपना!
पूर्व सांसद, मुंबई के पूर्व महापौर और वरिष्ठ कामगार नेता डॉ. शांति पटेल ने करीब 15 वर्ष पहले गोदी मजदूरों को वाजिब दर पर घर देने की मांग उठाई थी। उन्होंने पोर्ट बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव रखने के साथ ही तत्कालीन केंद्रीय नौवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी निवेदन दिया था।
अब मुंबई पोर्ट को प्राधिकरण का दर्जा मिल चुका है और उसकी जमीन विभिन्न सरकारी संस्थाओं को लीज पर दी जा रही है। ऐसे में यूनियन का सवाल है यदि मुंबई पोर्ट की जमीन पर बिहार भवन बन सकता है, तो पोर्ट के लिए जीवन खपा देने वाले मजदूरों के घर क्यों नहीं बन सकते?
‘जिन्होंने पोर्ट बनाया, उन्हें ही घर से वंचित क्यों?’
मुंबई पोर्ट के 154 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस पूरे सफर में गोदी मजदूरों ने बारिश, धूप और रात-दिन की परवाह किए बिना बंदरगाह की व्यवस्था संभाली। अनेक मजदूर बिना अपने घर का सपना पूरा किए सेवानिवृत्त हो गए।यूनियन ने मांग की है कि मुंबई पोर्ट विशेष आवास योजना के लिए जमीन चिन्हित करे और वाजिब दर पर उपलब्ध कराकर गोदी मजदूरों को मालिकाना हक का घर देने की योजना लागू करे।मुंबई को समृद्ध बनाने वाले मजदूरों का मुंबई में अपना घर कब होगा? यही सवाल अब पोर्ट प्रशासन के सामने है।
