-नैनी बाजार की तंग गलियां बनीं जलभराव का स्थायी ठिकाना…हर बारिश में नगर निगम के निरीक्षण और दावों की खुलती पोल
राजेश सरकार / प्रयागराज
नैनी बाजार के घनी आबादी वाले यमुनानगर मोहल्ले में बारिश ने एक बार फिर नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। तंग गलियों में बारिश का पानी जमा होने से लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई। तस्वीर में स्थानीय लोग पानी से होकर गुजरने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं। हालत यह है कि बारिश होते ही यमुनानगर समेत नैनी बाजार के कई मोहल्लों में सड़क और गलियां जलभराव की चपेट में आ जाती हैं।
नैनी बाजार की भौगोलिक बनावट और घनी आबादी के बीच जलनिकासी की समस्या कोई नई नहीं है। मुख्य मार्ग से निकलकर शेष गलियों के रास्ते मोहल्लों तक पहुंचने वाले लोगों को बारिश के दिनों में जलभराव से जूझना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से समस्या जस की तस बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान के नाम पर हर साल निरीक्षण और योजनाओं का दौर जरूर चलता है।
हर बारिश में निरीक्षण, फिर वही कहानी
नगर निगम जोन-5 के अभियंताओं की ओर से बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण किए जाने और समस्या के निदान के लिए प्लान तैयार किए जाने की बात सामने आती रही है। सवाल यह है कि यदि निरीक्षण और प्लान लगातार हो रहे हैं तो उसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई देता?
बारिश आते ही वही गलियां पानी में डूब जाती हैं, वही परेशानी सामने खड़ी होती है और स्थानीय लोगों को फिर उसी संकट से गुजरना पड़ता है। इससे नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्लान कागज पर, परेशानी सड़क पर
यमुनानगर और नैनी बाजार के दूसरे मोहल्लों में जलभराव अब महज बारिश के मौसम की समस्या नहीं, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल बन चुका है। नालियों की सफाई, जलनिकासी की क्षमता और पानी की निकासी के स्थायी इंतजामों को लेकर किए जाने वाले दावों की असली परीक्षा बारिश में होती है और हर बार तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है।
आखिर कब तक निरीक्षण की खानापूर्ति और कागजी प्लान के सहारे नैनी बाजार के लोगों को जलभराव की सजा भुगतनी पड़ेगी? नगर निगम को अब निरीक्षण की तस्वीरों और कागजी योजनाओं से आगे बढ़कर ऐसा स्थायी इंतजाम करना होगा, जिससे अगली बारिश में यमुनानगर की गलियां फिर जलाशय में तब्दील न हों।
