मुख्यपृष्ठस्तंभकहानी अनकही : नाकामयाबी जब हार गई

कहानी अनकही : नाकामयाबी जब हार गई

सना खान

‘जिस लड़की से कभी कहा गया था, ‘तुमसे नहीं होगा’, उसी ने एक दिन सबको गलत साबित कर दिया।’ हॉल तालियों की गूंज से भरा हुआ था। मंच पर खड़ी रिया के चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। उसके हाथ में सम्मान था और आंखों में वर्षों के संघर्ष के बाद मिली जीत की चमक। लोग हैरानी से एक-दूसरे से पूछ रहे थे, ‘क्या यह वही रिया है?’ लेकिन कुछ साल पहले तक तस्वीर बिल्कुल अलग थी।
रिया एक साधारण परिवार की लड़की थी, जिसके सपने उसके हालात से कहीं बड़े थे। वह अपनी पहचान बनाना चाहती थी, कुछ ऐसा करना चाहती थी, जिससे लोग उसे उसके नाम से जानें। मगर हर कदम पर मुश्किलें उसका रास्ता रोक लेती थीं। कभी आर्थिक तंगी, कभी लगातार असफलताएं और कभी लोगों के ताने। धीरे-धीरे लोगों ने उसके लिए फैसले सुनाने शुरू कर दिए थे। ‘रिया से नहीं होगा।’ ‘इतने बड़े सपने हर किसी के बस की बात नहीं होते।’ ‘अब इसे हकीकत स्वीकार कर लेनी चाहिए।’ ये बातें रिया को भीतर तक तोड़ देती थीं। कई रातें उसने रोते हुए बितार्इं। कई बार उसे खुद पर भी शक होने लगा। मगर उसके भीतर कहीं एक छोटी-सी आवाज हमेशा कहती थी, ‘बस एक कोशिश और।’ जब लोग उसकी असफलताएं गिन रहे थे, तब रिया खुद को बेहतर बनाने में जुटी थी। जब लोग उसका मजाक उड़ा रहे थे, तब वह अपनी कमजोरियों पर काम कर रही थी। उसने हार को अपनी किस्मत मानने से इनकार कर दिया। समय बीतता गया। संघर्ष खत्म नहीं हुए, लेकिन रिया पहले से मजबूत हो चुकी थी। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाने लगी। छोटी सफलताएं बड़े अवसरों में बदलने लगीं। और फिर एक दिन वह मुकाम भी आ गया, जिसके बारे में कभी लोग कहते थे, `यह इसके बस की बात नहीं।’ आज वही लोग उसकी सफलता की तारीफ कर रहे थे। रिया मुस्कुरा रही थी, क्योंकि उसकी सबसे बड़ी जीत सम्मान नहीं बल्कि वह भरोसा था, जो उसने सबसे कठिन दिनों में भी खुद पर बनाए रखा। वक्त ने आखिर साबित कर दिया कि नाकामयाबी अंत नहीं होती, बल्कि कामयाबी तक पहुंचने का सबसे कठिन रास्ता होती है।

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