मुख्यपृष्ठस्तंभउड़न छू : जुगनू और सांप

उड़न छू : जुगनू और सांप

 अजय भट्टाचार्य

अशोक वाटिका में रावण द्वारा स्वयं को शक्तिशाली बताने पर सीता जी ने कहा था कि रावण जुगनू की रौशनी से सरोवर में कमलनी नहीं खिलती, अर्थात वह उन्हें प्रभावित नहीं कर सकता। जब सीता जी ने राम की तुलना में उसे तुच्छ (जुगनू) बताया, तो रावण शर्मिंदा हुआ और झेंप मिटाने के लिए तलवार निकालकर डराने लगा।
द्वापर युग में गांधारी ने अपने पति धृतराष्ट्र के अंधे होने के कारण स्वयं भी आजीवन आंखों पर पट्टी बांधी थी। कहानी में गांधारी एक कांच की बोतल में जुगनू को वैâद करके रखती हैं, जो उनके जीवन के अंधेरे में उम्मीद की एक छोटी किरण है। जब उन्हें अपने पुत्र दुर्योधन और भाई शकुनि के गलत कार्यों का पता चलता है, तो वे सत्य से विचलित होकर वह बोतल छोड़ देती हैं, जिससे वह टूट जाती है और जुगनू उड़ जाते हैं। हम सब जानते हैं कि जुगनू जब तक जिंदा रहता है, तब तक चमकता है, रौशनी पैâलाता है। अधिकांश जुगनू पंख वाले होते हैं, जिन्हें अक्सर ग्लोवर्म कहा जाता है। जुगनू के नाम से एक फिल्म भी बनी थी, लेकिन उसमें किसी जुगनू ने काम नहीं किया था।
एक और कहानी है। एक दिन एक सांप एक जुगनू का पीछा करने लगा। सांप को पीछा करते देख जुगनू घबरा गया, उसे थोड़ा अजीब भी लगा। डर की वजह से जुगनू तेजी से उड़ने लगा। यह देखकर सांप भी तेजी से उसकी तरफ बढ़ने लगा। एक समय जुगनू को लगा कि सांप उसका पीछा नहीं छोड़ेगा और उसे खा जाएगा। स्थिति को भांपकर, जुगनू रुक गया।
जुगनू ने सांप से कहा, `क्या मैं आपसे तीन प्रश्न पूछ सकता हूं?’ सांप ने कहा, `हां, बिलकुल।’ `क्या आप जिस तरह के जीव खाते हो, मैं उनमें से एक हूं?’ ‘नहीं।’ दूसरा प्रश्न, ‘क्या मैंने तुम्हारा कुछ नुकसान किया है?’ ‘नहीं।’
तीसरा और आखिरी ‘फिर तुम मुझे क्यों निगलना चाहते हो?’ ‘क्योंकि मैं तुम्हें चमकते हुए नहीं देख सकता।’ इस कहानी का सार यह है कि हर व्यक्ति को जीवन में ऐसे लोग मिलते हैं, जिनका उस व्यक्ति से कोई संबंध नहीं, जिनका उसने कुछ नहीं बिगाड़ा लेकिन वो उसको चमकते हुए नहीं देख सकते। इसलिए वे सांप की तरह उस व्यक्ति नष्ट करने का प्रयास करते हैं। भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में कई ऐसे चमकते नाम हैं, जिन्होंने कभी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा। मगर मनुष्य योनि के कुछ सांपों को उनका चमकना अच्छा नहीं लगता। आजादी मिलने के बाद से वे उन चमकते नामों को मिटाने की कोशिश में लगे हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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