राजन पारकर
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब पीकर लोग मर गए, लेकिन सत्ता के गलियारों में अब भी ‘सब नियंत्रण में है’ का ढोल पीटा जा रहा है। अरे भैया, यह दारू थी या केमिस्ट्री लैब का प्रैक्टिकल? मिथेनॉल मिलाकर शराब बेचने वाले योगेश वानखेडे ने मानो जनता को नहीं, सीधे श्मशान घाट को सप्लाई की थी!
सरकार हर बार मरने वालों की गिनती करती है, लेकिन जहर बेचने वालों की जड़ तक कभी नहीं पहुंचती। क्योंकि शराब के अड्डे पुलिस को दिखते नहीं, नेताओं को सुनाई देते नहीं और प्रशासन को गंध देते नहीं! जब तक गरीब आदमी मरता है, तब तक फाइलों पर सिर्फ ‘जांच जारी है’ का धूपबत्ती जलता रहता है। वाह रे महाराष्ट्र! यहां शराब पीने वाला नहीं मरता, बल्कि व्यवस्था उसे मारती है और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में संवेदना का शरबत बांटा जाता है।
आरक्षण की राजनीति
आग दोनों तरफ, रोटी सत्ता की!
मनोज जरांगे पाटील फिर मैदान में उतरने वाले हैं और उधर ओबीसी महासंघ ने भी तलवारें चमकानी शुरू कर दी हैं। महाराष्ट्र में अब आंदोलन नहीं होते, मानो जातीय कुश्ती प्रतियोगिता चल रही हो! एक तरफ मराठा आरक्षण की मांग, दूसरी तरफ ओबीसी समाज का इशारा ‘हमारा हिस्सा छुआ तो राज्य जलेगा! सरकार बीच में वैसे खड़ी है जैसे शादी में पकड़ा गया नकली फोटोग्राफर न इधर का, न उधर का!
मध्य रेल्वे: ट्रेन कम, यात्री परीक्षा ज्यादा!
मध्य रेल्वे में फिर तकनीकी खराबी! डेक्कन एक्सप्रेस रास्ते में अटक गई और लाखों यात्रियों की जिंदगी प्लेटफॉर्म पर लटक गई। मुंबई की लोकल अब परिवहन कम और भाग्य परीक्षा ज्यादा बन चुकी है। हर दूसरे दिन घोषणा होती है यात्रियों से असुविधा के लिए खेद है। अरे साहब, जनता अब खेद नहीं, इलाज मांग रही है! सरकार बुलेट ट्रेन के सपने दिखा रही है, जबकि आम आदमी की लोकल आज भी खटारा बैलगाड़ी की आत्मा लेकर दौड़ रही है। मुंबई का कर्मचारी अब ऑफिस कम और रेलवे प्लेटफॉर्म ज्यादा देखता है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में रेलवे टिकट पर लिखा होगा – यात्रा मंगलमय हो, पहुंचना आपकी किस्मत!
मछली बंद, मगर भ्रष्टाचार खुला!
१ जून से फिशिंग बंद होगी। कारण बताया गया मछलियों का प्रजनन और मछुआरों की सुरक्षा! सुनने में कितना सुंदर लगता है न? लेकिन बेचारे मछुआरे पूछ रहे हैं साहब, हमारे घर का चूल्हा किस मौसम में प्रजनन करेगा? सरकार समुद्र में मछलियों की चिंता कर रही है, मगर किनारे पर भूखे मछुआरों की नहीं। वाह रे व्यवस्था, यहां समुद्र में जाल डालना अपराध है, लेकिन जनता पर झूठ का जाल डालना राजनीति!
