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फलसफा : तेजी से बदलती दुनिया में धैर्य सबसे दुर्लभ गुण बन गया है

सना खान

रिया पिछले दो वर्षों से एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसके दिन किताबों, नोट्स और मॉक टेस्ट के बीच बीतते थे। उसे विश्वास था कि उसकी मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी।
लेकिन समय के साथ उसका आत्मविश्वास डगमगाने लगा। हर सुबह जब वह फोन खोलती, तो किसी दोस्त की नई नौकरी की तस्वीर दिखाई देती। कोई विदेश चला गया था, किसी का प्रमोशन हो गया था और किसी की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई थीं। धीरे-धीरे रिया को लगने लगा कि जैसे पूरी दुनिया आगे बढ़ रही है और वह वहीं खड़ी रह गई है। एक शाम उसने अपनी बड़ी बहन से कहा, ‘मुझे समझ नहीं आता कि मैं मेहनत तो उतनी ही कर रही हूं, फिर भी सब लोग मुझसे आगे वैâसे निकल गए?’ कुछ दिनों बाद रिया अपनी बहन के लैपटॉप में एक जरूरी फाइल ढूंढ रही थी। तभी उसकी नजर एक पुराने फोल्डर पर पड़ी। उसने उसे खोला, तो अंदर कई कंपनियों के ईमेल थे। उत्सुकता से उसने वह फोल्डर खोला। अंदर कई कंपनियों के ईमेल थे। ‘हमें खेद है कि इस बार आपका चयन नहीं हो सका।’ ‘आप अंतिम चरण तक पहुंचीं, लेकिन हम किसी और उम्मीदवार के साथ आगे बढ़ रहे हैं।’ ऐसे दर्जनों ईमेल थे। रिया हैरान रह गई। उसकी बहन आज एक अच्छी नौकरी में थी, लेकिन उसने कभी अपने संघर्षों के बारे में बात नहीं की थी। शाम को रिया ने उनसे पूछा, ‘आपने मुझे यह सब कभी क्यों नहीं बताया?’ बहन मुस्कुराई और बोली, ‘क्योंकि लोगों को अक्सर मंजिल दिखाई देती है, रास्ता नहीं। हर उपलब्धि के पीछे कई असफलताएं और लंबे इंतजार छिपे होते हैं।’
उस रात रिया बहुत देर तक जागती रही। उसे पहली बार एहसास हुआ कि उसकी बेचैनी मेहनत की वजह से नहीं, बल्कि दूसरों की रफ्तार से अपनी तुलना करने की वजह से थी। अगली सुबह उसने फिर अपनी किताब खोली, लेकिन इस बार उसके भीतर जल्दबाजी नहीं थी। तेजी से बदलती दुनिया में धैर्य सबसे दुर्लभ गुण बन गया है। जब हर चीज तुरंत मिल रही हो, तब अपने सपनों के लिए लगातार मेहनत करते रहना और सही समय का इंतजार करना ही असली ताकत है।

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