-ज्ञान नहीं, जवाब दो; पेपर लीक पर छात्रों ने सरकार को घेरा
जेदवी / मुंबई
देशभर में परीक्षा धांधली और पेपर लीक के खिलाफ बढ़ते आक्रोश के बीच गुरुवार को मुंबई के आजाद मैदान में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में विशाल और शांतिपूर्ण आंदोलन किया गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन के समर्थन में हुए इस आंदोलन में हजारों छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों ने भाग लेकर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग बुलंद की।
आयोजकों के अनुसार, आंदोलन में हजारों युवाओं और समर्थकों ने हिस्सा लिया। मुंबई के विभिन्न कॉलेजों से पहुंचे छात्र हाथों में तख्तियां और कॉकरोच मास्क पहनकर प्रदर्शन में शामिल हुए। सुबह १० बजे से शाम ५ बजे तक चले इस शांतिपूर्ण आंदोलन में युवाओं ने कविताएं, गीत और नारों के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। सीजेपी के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन को आम आदमी पार्टी मुंबई, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन मुंबई सहित कई छात्र संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों का समर्थन मिला। मंच से वक्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की।
वांगचुक के आंदोलन को समर्थन
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे लद्दाख के सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की गई। प्रदर्शनकारियों ने उनके आंदोलन को समर्थन देते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार से गंभीर पहल करने की मांग की।
संसद तक शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान
उधर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल १६ जुलाई को १९वें दिन में प्रवेश कर गई। केवल पानी के सहारे चल रहे उनके अनशन के कारण स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वांगचुक ने २० जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च का भी आह्वान किया है।
धर्मेंद्र प्रधान और दादा भुसे इस्तीफा दो!
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में कथित नीट-यूजी पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, महाराष्ट्र के टीईटी पेपर लीक प्रकरण को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग कर पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करना, वर्ष २०२७ से प्रस्तावित एमपीएससी प्रारंभिक परीक्षाओं को ऑनलाइन कराने के निर्णय का विरोध तथा राज्य में रिक्त सरकारी पदों पर शीघ्र भर्ती निकालने की मांग प्रमुख रही।
