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मानसून में बढ़ा डेंगू-मलेरिया का खतरा… मुंबई वेंटिलेटर पर!.. १०.६९ लाख घरों की जांच, ३ हजार से ज्यादा मामले दर्ज

द्रुप्ति झा / मुंबई

मुंबई में मानसून के साथ मच्छरजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। जगह-जगह जमा पानी, निर्माण स्थलों पर खुले गड्ढे और कबाड़-पुराने टायरों में भरा पानी डेंगू और मलेरिया के मच्छरों के लिए प्रजनन केंद्र बन गए हैं। मनपा स्वास्थ्य विभाग के १ जनवरी से १४ जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में मलेरिया के ३,६८१ और डेंगू के ९३८ मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले साल इसी अवधि में मलेरिया के ३,११५ और डेंगू के ७३४ मामले थे। इसके अलावा लेप्टोस्पायरोसिस के १५७ और स्वाइन फ्लू के ११३ मामले भी सामने आए हैं। इससे अस्पतालों की ओपीडी में भीड़ बढ़ गई है।
५४,७६३ लोगों की रक्त जांच
निर्माण स्थलों पर काम करने वाले ५४,७६३ मजदूरों के रक्त नमूनों की जांच में ३७ मजदूर मलेरिया संक्रमित पाए गए। मनपा ने मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करने के लिए घर-घर सर्वे, लार्वा जांच, दवा छिड़काव, फॉगिंग और निर्माण स्थलों की निगरानी शुरू की है। अभियान के तहत ६६,५९५ कबाड़ और पुराने टायर भी हटाए गए हैं। बांद्रा निवासी सोनी राजपूत ने कहा कि बारिश के बाद उनके इलाके में कई दिनों तक पानी जमा रहता है। समय पर सफाई और दवा छिड़काव हो तो बीमारी का खतरा कम हो सकता है।
डॉक्टरों की नागरिकों से अपील
डॉक्टरों का कहना है कि तेज बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द, सिरदर्द या लगातार बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। मानसून में घर के आसपास पानी जमा न होने दें, टंकियों को ढककर रखें, पुराने टायर-कबाड़ हटाएं और मच्छररोधी उपाय अपनाएं।
हॉटस्पॉट बने डी और ई वार्ड
साउथ मुंबई का ई-वार्ड यानी भायखला-मुंबई सेंट्रल और डी-वार्ड यानी मलाबार हिल-ग्रांट रोड इस समय सबसे बड़े हॉटस्पॉट बने हैं। १ जून से १४ जुलाई के बीच मनपा की टीमों ने १०.६९ लाख से ज्यादा घरों और ३६.८१ लाख लोगों का सर्वे किया। इस दौरान मलेरिया पैâलाने वाले एनोफिलीस मच्छरों के ५,३४१ और डेंगू पैâलाने वाले एडीज मच्छरों के २२,०४१ प्रजनन स्थल नष्ट किए गए।

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