सूफी खान
मिडिल ईस्ट में ये चर्चा जोरों पर रही है कि अगर अमेरिका ईरान की जमीन पर उतरा तो ईरान कुवैत में घुस जाएगा। अमेरिका ने ईरान की जमीन पर कदम भी रखे तो ईरान, इराक के रास्ते कुवैत में घुस जाएगा और अमेरिकी बेस पर कंट्रोल हासिल कर लेगा। कुवैत पर ईरान ने पिछले दिनों काफी बड़े और ताकतवर हमले अंजाम भी दिए थे। खबर आई है कि सऊदी की तरह कुवैत ने भी पाकिस्तान से डिफेंस डील कर ली है। कुवैत ने पाकिस्तान के साथ हुए रक्षा सहयोग समझौते को करीब तीन साल बाद आधिकारिक मंजूरी दे दी है। कुवैत के शाही फरमान के बाद अब यह समझौता लागू हो गया है। दोनों देशों के बीच इस डील पर ११ जून २०२३ को दस्तखत किए गए थे, लेकिन कानूनी दांव पेंच पूरे होने में वक्त लगा। अब कुवैत सरकार ने इसे अपने कानून का हिस्सा बना लिया है। कुवैत पाकिस्तान डील के तहत दोनो मुल्क आर्मी ट्रेनिंग, डिफेंस ट्रेनिंग, खुफिया जानकारी साझा करने, रसद व्यवस्था और डिफेंस तकनीक जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। कुवैती मीडिया के मुताबिक, वहां के शाही फरमान में कहा गया है कि कुवैत सरकार और पाकिस्तान सरकार के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर हुए समझौते को मंजूरी दी जाती है। पहले सऊदी के साथ पाकिस्तान की डिफेंस डील। ये अलग बात है कि वो डील किसी काम की नहीं निकली। इस वक्त यमन के हूती सऊदी पर हमलावर है और सऊदी भी अमेरिका की मदद से उन पर हमले कर रहा है। तब भी पाकिस्तान चुप है, क्यों कि वो ईरान को भी नाराज नहीं करना चाहता। हूती ईरान समर्थक हैं। लेकिन फिर भी पेपर पर सऊदी पाकिस्तान डील तो है। पाकिस्तान के ५ हजार फौजी भी सऊदी में मौजूद हैं। अब कतर के साथ पाकिस्तान का रक्षा समझौता कितना कारगर होगा, ये तो समय बताएगा। गौरतलब है कि मुस्लिम देशों के बीच पाकिस्तान की सेना काफी प्रोफेशनल मानी जाती है। रिटारयमेंट के बाद भी पाकिस्तानी जनरल और सेना के बड़े अधिकारी अक्सर मिडिल ईस्ट में जमे रहते हैं और वहां की फौजो कों ट्रेंड करते हैं। ये और बात है कि जब पानी सिर से गुजरता है तो अरब देशों को अमेरिका ही बचाता है। वो भी इजरायल महफूज रहे इसलिए।
बताया जा रहा है कि कतर पाकिस्तान डील में कुल १२ पॉइंट शामिल हैं। इसमें दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग का ढांचा तय किया गया है। समझौते के तहत सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा संस्थानों के बीच संपर्क, संयुक्त गतिविधियां और अनुभव साझा करने जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देश संवेदनशील सैन्य जानकारी की सुरक्षा, गोपनीयता बनाए रखने और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी तकनीकी जानकारी को सुरक्षित रखने पर भी सहमत हुए हैं। पाकिस्तान पहले से ही खाड़ी देशों के साथ सैन्य संबंध रखता है। कुवैत के साथ यह समझौता पाकिस्तान को अपनी सैन्य ट्रेनिंग और रक्षा विशेषज्ञता साझा करने का अवसर देगा वहीं, कुवैत के लिए भी पाकिस्तान के साथ सहयोग सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात के बीच कुवैत कई देशों के साथ रक्षा साझेदारी मजबूत कर रहा है। कुल मिलाकर, तीन साल बाद लागू हुआ यह समझौता पाकिस्तान और कुवैत के बीच सैन्य सहयोग का नया रास्ता खोलता है, लेकिन इसका असर दिखे तब महत्व है, क्यों कि सऊदी-पाकिस्तान रक्षा सहयोग जमीन पर तो फेल ही नजर आ रहा है।
