-ऑनलाइन व्यंग्य आंदोलन अब चुनाव आयोग के दरवाजे तक
सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई कॉकरोच जनता पार्टी अब मजाक और मीम से आगे बढ़कर राजनीतिक-वैधानिक विवाद में फंसती दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विवाद इस बात को लेकर खड़ा हुआ है कि इस ऑनलाइन व्यंग्य आंदोलन के नाम, पहचान और लोगो पर असली दावा किसका है, अमेरिका में रहने वाले संस्थापक अभिजीत दीपके का या हरियाणा के एक वकील का, जिन्होंने कथित तौर पर चुनाव आयोग में पार्टी के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की है।
रिपोर्टों के अनुसार, हरियाणा के पानीपत से जुड़े वकील सुधीर जाखड़ ने चुनाव आयोग में कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से पंजीकरण का आवेदन दिया है। दावा किया गया है कि आवेदन में खुद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बताया गया और कॉकरोच वाले लोगो का भी इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर, इस आंदोलन से जुड़े समर्थकों का कहना है कि कॉकरोच जनता पार्टी की पहचान, नाम और डिजिटल लोकप्रियता अभिजीत दीपके और ऑनलाइन युवाओं ने मिलकर बनाई थी। इसी कारण सोशल मीडिया पर इसे ‘हाइजैक’ यानी कब्जे की कोशिश कहा जा रहा है।
यह मामला केवल एक पार्टी के नाम का विवाद नहीं है। यह सवाल भी उठता है कि क्या इंटरनेट पर जन्म लेने वाले व्यंग्यात्मक आंदोलन को कोई व्यक्ति कागजी प्रक्रिया के जरिए अपने नाम से पंजीकृत करा सकता है? यदि ऐसा हुआ तो डिजिटल आंदोलनों, मीम आधारित जनमत और ऑनलाइन राजनीतिक व्यंग्य की स्वामित्व-सीमा पर नया विवाद खड़ा हो सकता है।
कॉकरोच जनता पार्टी पहले भी चर्चा में रही है। हाल ही में इसके एक्स अकाउंट को भारत में रोके जाने की खबर सामने आई थी, जिसकी पुष्टि संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर की थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह पार्टी भारतीय राजनीति पर व्यंग्य और बेरोजगार युवाओं की नाराजगी को लेकर चर्चित हुई थी। अब नजर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर है। आयोग आवेदन, दस्तावेज, आपत्तियां और वैधानिक दावे देखने के बाद ही किसी दल के पंजीकरण पर निर्णय लेता है। फिलहाल, यह विवाद युवाओं के ऑनलाइन व्यंग्य आंदोलन और पारंपरिक चुनावी कानून के टकराव की दिलचस्प मिसाल बन गया है।
