सुरेश गोलानी / मुंबई
उत्तन के धावगी इलाके में मीरा-भायंदर महानगरपालिका के ठेकदारों द्वारा संचालित कचरा प्रबंधन प्रोजेक्ट के पास स्थित डंपिंग यार्ड में जमा कचरे के पहाड़ में शनिवार सुबह एक बार फिर भीषण आग लग गई। आग लगने की इस घटना से पूरे तटीय क्षेत्र में हड़कंप मच गया, और स्थानीय नागरिक प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर बेहद हैरान व आक्रोशित हैं। सुबह तड़के कचरे के ढेर से अचानक आग की लपटें और काले धुएं का गुबार उठता देख आसपास के ग्रामीणों में दहशत पैâल गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे पूरे इलाके में घना और जहरीला धुआं पैâल गया है। लगातार आग की घटनाओं के कारण निकलने वाले जहरीले धुएं से स्थानीय निवासियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में भारी कठिनाई और आंखों में जलन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सूचना मिलते ही मनपा के अग्निशमन दल की गाड़ियां और पानी के टैंकर मौके पर पहुंच गए हैं। दमकल कर्मियों द्वारा आग पर काबू पाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कचरे के भीतर मीथेन गैस और ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उत्तन के इस डंपिंग ग्राउंड में आए दिन आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन इस पर स्थायी रोक लगाने में विफल रहा है। लोगों ने कचरा प्रबंधन की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए इस डंपिंग यार्ड को जल्द से जल्द अन्यत्र स्थानांतरित करने और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मनपा प्रशासन कचरे के पहाड़ को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। कचरा प्रबंधन के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आ रहा है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल तकनीकी उपायों का झुनझुना दिखाकर जनता को गुमराह कर रहा है।
आग लगी या लगाई गई? लोगों में गहराया संदेह
बार-बार हो रही आगजनी की इन घटनाओं ने स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों के मन में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि कचरे के इस पहाड़ में आग प्राकृतिक रूप से लगी है या फिर किसी सोची-समझी साजिश के तहत जानबूझकर लगाई गई है।
