मुख्यपृष्ठअपराधअंतर्वेग : २० साल बाद सुलझी मर्डर मिस्ट्री ...पकड़ में आया कातिल! 

अंतर्वेग : २० साल बाद सुलझी मर्डर मिस्ट्री …पकड़ में आया कातिल! 

नागमणि पांडेय

सच ही कहा गया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। कातिल कितना भी शातिर क्यों न हो पुलिस की गिरफ्त में आ ही जाता है। सांताक्रुज पुलिस ने रूपेश रामनाथ राय नामक हत्या के आरोपी को पकड़ा है, जो २० वर्ष तक पुलिस को छकाता रहा। रूपेश पर आरोप है कि उसने २० साल पहले सांताक्रुज के एक होटल में अपने साथ ठहरे दिल्ली के दीपक राठौड़ का कत्ल करने के बाद १ लाख ३० हजार रुपए लूटकर भाग गया था। जॉइंट कमिश्नर सत्य नारायण चौधरी ने बताया कि पुलिस को रूपेश के पास से जो आधार कार्ड मिला, उसमें उसका नाम अतुल विजय केडिया लिखा था। वह बिहार के मुजफ्फरपुर के तालुका औराई के भरथुआ गांव का मूल निवासी है। मुंबई पुलिस २० साल में १५ से २० बार उसके गांव गई, लेकिन वह कभी अपने गांव में नहीं मिला।
डीसीपी कृष्णकांत उपाध्याय के अनुसार, पिछले महीने एपीआई तुषार कदम और पीएसआई शिवकुमार जाधव की टीम बिहार के भरथुआ गांव में कई दिन तक डेरा डाले रही। साथ ही बिहार गई जांच टीम ने मुंबई टीम से शेयर की। तत्काल सांताक्रुज पुलिस स्टेशन से इंस्पेक्टर संदीप विश्वासराव और अरुण घोडके सादी वर्दी में वहां जाकर सिर्फ इतना पूछा कि यहां अतुल विजय केडिया कौन है? जवाब में खुद केडिया का मुंह पुलिस की तरफ मुड़ गया। उसे तत्काल गिरफ्त में ले लिया गया। उसने पुलिस पूछताछ में मान लिया कि उसी ने दीपक राठौड़ का कत्ल किया था। उसका ओरिजिनल नाम रूपेश रामनाथ राय है।
मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि रूपेश साल २००० में काम के सिलसिले में दिल्ली आया। काम नहीं मिला तो उसने पिस्टल खरीदी, लेकिन २००१ में दिल्ली पुलिस ने आर्म्स एक्ट में उसे गिरफ्तार कर लिया। कुछ महीने बाद वह जेल से बाहर आ गया। उसी दौरान रूपेश जहां टैक्सी ड्राइविंग सीख रहा था, वहीं दीपक राठौड़ ड्राइविंग सिखाने का काम दीपक राठौड़ करते थे। दीपक ने रूपेश को ड्राइविंग सिखाई। इसी बहाने दोनों की पहचान हो गई, लेकिन ड्राइविंग सीखने के बावजूद रूपेश ने दिल्ली में टैक्सी नहीं चलाई। उसने और दीपक ने बाद में मिलकर कपड़ों की पैकिंग का काम शुरू कर दिया, फिर गारमेंट्स का बिजनेस शुरू करने का पैâसला किया।
 २००३ में किया था मर्डर
३१ मई २००३ को दीपक और रूपेश कपड़े खरीदने के लिए मुंबई आए। दीपक के पास १ लाख ३० हजार का वैâश था। दोनों ने सांताक्रुजज के होटल नेस्ट में कमरा नंबर १०८ बुक कराया। इसके बाद दोनों गिरगांव चौपाटी, जुहू चौपाटी, गेट वे ऑफ इंडिया और मुंबई में कई दूसरी जगहों पर घूमने गए। बाद में रूपेश होटल के कमरे से निकल गया, जबकि दीपक कमरे में ही रहे। ४ जून २००३ को सुबह दस बजे रूम सर्विस बॉय दिनकर शेट्टी ने कमरे का दरवाजा कई बार खटखटाया। अंदर से जब कोई रिस्पॉन्स नहीं आया तो उसने होटल मैनेजर को सूचना दी। इसके बाद मास्टर की से दरवाजा खोला गया। बेड पर सिर्फ एक व्यक्ति चादर ओढ़कर लेटा था। उसे हिलाया गया तो शरीर में कुछ हरकत नहीं हुई। चादर हटाते ही पता चला कि वह तो मर चुका है। पुलिस को सूचना दी गई। लाश का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला कि यह मर्डर है।

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