अनिल मिश्र / पटना
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), गया महानगर के प्रतिनिधिमंडल ने गया कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात कर महाविद्यालय में सभी छात्र-छात्राओं के लिए इंटर्नशिप पूर्णतः निशुल्क कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इंटर्नशिप विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा है। इसके नाम पर छात्रों से 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क वसूलना पूरी तरह अनुचित है। जब नामांकन के समय छात्र-छात्राएं सभी निर्धारित शुल्क जमा कर चुके होते हैं, तब इंटर्नशिप की व्यवस्था करना महाविद्यालय की जिम्मेदारी है। निजी कंपनियों एवं एजेंसियों के माध्यम से छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना शिक्षा के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के साथ अन्याय है।
इस संबंध में जिला संयोजक विनायक कुमार ने कहा कि विद्यार्थी परिषद किसी भी परिस्थिति में छात्रों का आर्थिक शोषण बर्दाश्त नहीं करेगी। इंटर्नशिप शिक्षा का अभिन्न अंग है, इसलिए इसके लिए अलग से शुल्क लेना पूरी तरह अनुचित और छात्र-विरोधी है। महाविद्यालयों को स्वयं पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण इंटर्नशिप की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि अतिरिक्त शुल्क वसूली बंद नहीं हुई, तो परिषद छात्रहित में लोकतांत्रिक एवं चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
वहीं, गया महानगर मंत्री आदित्य मिश्रा ने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, कमाई का नहीं। विद्यार्थियों से इंटर्नशिप के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेना शिक्षा के उद्देश्य के विपरीत है। एबीवीपी की मांग है कि सभी छात्र-छात्राओं के लिए इंटर्नशिप पूरी तरह निशुल्क कराई जाए, किसी भी प्रकार की अतिरिक्त शुल्क वसूली तत्काल बंद की जाए तथा महाविद्यालय स्वयं पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण इंटर्नशिप की व्यवस्था सुनिश्चित करे। विद्यार्थियों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
छात्र नेता सूरज सिंह ने कहा कि इंटर्नशिप के नाम पर छात्रों से किसी भी परिस्थिति में एक भी रुपये की अतिरिक्त वसूली स्वीकार नहीं की जाएगी। यह छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था है, जिसका अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पुरजोर विरोध करती है। जब विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में इंटर्नशिप पहले से अनिवार्य है और नामांकन के समय छात्र-छात्राएं सभी निर्धारित शुल्क जमा कर चुके हैं, तब अलग से शुल्क लेना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और छात्र-विरोधी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़ी अनियमितता की आशंका है, जिसमें मगध विश्वविद्यालय के पदाधिकारी और कॉलेजों के प्राचार्य भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह कमीशन का खेल बताते हुए कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब राजभवन ने इंटर्नशिप को निशुल्क करने संबंधी पत्र जारी किया है, तो फिर शुल्क क्यों लिया जा रहा है। यह लूट का खेल अब नहीं चलेगा।
सूरज सिंह ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने की मानसिकता अब समाप्त होनी चाहिए। छात्र हितों की अनदेखी कर आर्थिक शोषण करने वाले किसी भी महाविद्यालय या जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। यदि इंटर्नशिप के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूली तत्काल प्रभाव से बंद नहीं की गई, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद चरणबद्ध एवं व्यापक छात्र आंदोलन शुरू करेगी। महाविद्यालयों का घेराव, विश्वविद्यालय प्रशासन के विरुद्ध प्रदर्शन तथा उच्च शिक्षा विभाग एवं राजभवन तक शिकायत सहित सभी लोकतांत्रिक संघर्ष किए जाएंगे। विद्यार्थी परिषद का स्पष्ट संदेश है कि छात्रहित सर्वोपरि है और छात्रों के आर्थिक शोषण के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई हर स्तर पर लड़ी जाएगी।
