अनिल मिश्र / रांची
पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की सुरंग में हुए भीषण हादसे ने झारखंड के कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में अब तक 22 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों में झारखंड के चार श्रमिक भी शामिल हैं। इनमें हजारीबाग के बरही निवासी जागेश्वर ठाकुर, खूंटी जिले के रनिया प्रखंड के कृष्णा साहू और विकास कंडुलना तथा चाईबासा के बंदगांव निवासी मसीह बारजो की मौत हो गई।
हादसे की खबर मिलते ही खूंटी, हजारीबाग और पश्चिमी सिंहभूम के गांवों में मातम छा गया। बताया जाता है कि खूंटी के कृष्णा साहू पिछले करीब तीन वर्षों से परियोजना में कार्यरत थे। वह इसी महीने की शुरुआत में घर से काम पर लौटे थे। हादसे के बाद बुधवार को सुरंग से शव निकाले जाने पर उनके बड़े भाई ने उनकी पहचान की और परिवार को इसकी सूचना दी।
परिजनों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिलने के कारण युवाओं को मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है, लेकिन इस हादसे ने उनके परिवार की उम्मीदें हमेशा के लिए खत्म कर दीं। वहीं, विकास कंडुलना की पत्नी ने बताया कि वह फरवरी माह में गांव आए थे और मई में वापस काम पर चले गए थे। उन्होंने कहा था कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलानी है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद गुरुवार को रनिया के बीडीओ प्रशांत डांग, सीओ, लेबर सुपरिटेंडेंट वाल्टर कुजूर, जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मृतकों के घर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना देते हुए सरकारी प्रावधानों के तहत हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
जिला प्रशासन ने बताया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शवों को झारखंड लाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर झारखंड से हो रहे पलायन और स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी का मुद्दा चर्चा में आ गया है। जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया ने कहा कि राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीर प्रयास होने चाहिए। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष आनंद कुमार ने आरोप लगाया कि रोजगार के अभाव में युवाओं को दूसरे राज्यों में जोखिम भरे कार्य करने पड़ रहे हैं, जिसके कारण वे आए दिन ऐसे हादसों का शिकार हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, झारखंड और सिक्किम सरकार के समन्वय से एम्बुलेंस के माध्यम से शवों को सड़क मार्ग से झारखंड लाया जा रहा है, जिसके शुक्रवार शाम तक पहुंचने की संभावना है।
