सामना संवाददाता / मुंबई
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुए कथित अमानवीय लाठीचार्ज के विरोध में वंचित बहुजन आघाडी द्वारा गुरुवार को बुलाए गए महाराष्ट्र बंद को राज्य के कई हिस्सों में व्यापक समर्थन मिला। छात्रों के समर्थन और केंद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए वंचित बहुजन आघाडी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और व्यापारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपने प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की। इस बंद को वंचित बहुजन आघाडी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और शेतकरी कामगार पक्ष जैसे वामपंथी दलों के कार्यकर्ता, विभिन्न मजदूर संगठनों तथा भारतीय बौद्ध महासभा के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में बंद के समर्थन में सड़कों पर उतरे।
इन दलों के अनुसार, हाल के वर्षों में यह पहली बार है जब संगठन के आह्वान पर राज्य के कई हिस्सों में बंद का व्यापक असर दिखाई दिया। पार्टी का दावा है कि उसने जनता के सहयोग से इस बंद को सफल बनाया और छात्रों के मुद्दे को महाराष्ट्र के शहरों और कस्बों तक पहुंचाया। कई जगहों पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस मुर्दाबाद और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो जैसे नारे लगाकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। कई स्थानों पर व्यापारियों ने स्वत: अपने बाजार और दुकानें बंद रखकर आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया था। अकोला जिले के मुर्तिजापुर में कुछ दुकानों में तोड़-फोड़ की घटना को छोड़कर बंद राज्यभर में शांतिपूर्ण रहने का दावा किया गया।
