-मोदी सरकार को मीम्स से जवाब
उमन गुप्ता
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र विरोध स्वरूप मीम का भी सहारा ले रहे हैं। मीम में युवा छात्र अपने दिल का दुख व्यक्त करते हुए मोदी सरकार की शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ उसे आईना दिखाकर तरह-तरह के सवाल पूछ रहे हैं। कोई छात्र डिग्री का पुलिंदा उठाए दिख रहा है तो कोई पूछ रहा रहा है नौकरी कहां है। मीम का संदेश है कि पढ़ाई पूरी होने के बावजूद रोजगार के अवसर पर्याप्त नहीं हैं। यह मीम सोशल मीडिया पर युवाओं की निराशा और रोजगार की मांग का प्रतीक बनकर साझा किया जा रहा है।
पढ़ाई बनाम परीक्षा का इंतजार
एक अन्य मीम में छात्र को किताबों के ढेर पर बैठे दिखाया गया है, जबकि दूसरी ओर वैâलेंडर के पन्ने उड़ते जा रहे हैं। व्यंग्य यह है कि तैयारी पूरी है, लेकिन भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया में देरी से भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। प्रदर्शनकारी इसे व्यवस्था पर कटाक्ष बता रहे हैं।
लोकतंत्र का रिपोर्ट कार्ड
एक मीम में लोकतंत्र को शिक्षक और छात्रों को परीक्षार्थी के रूप में दिखाया गया है। रिपोर्ट कार्ड में रोजगार, शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया जैसे विषयों के सामने कम अंक दर्शाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि यह व्यवस्था से जवाबदेही मांगने का प्रतीकात्मक तरीका है।
वादा बनाम हकीकत
इस मीम में चुनावी वादों और जमीनी हालात की तुलना की गई है। एक तरफ बड़े-बड़े वादे और दूसरी तरफ भर्ती का इंतजार करते छात्र दिखाए गए हैं। प्रदर्शनकारी इसे चुनावी घोषणाओं और वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर पर व्यंग्य बताते हैं।
युवा पूछ रहा है सवाल
एक लोकप्रिय मीम में छात्र के हाथ में तख्ती है, जिस पर लिखा है, मेहनत मेरी, मौका कब? यह मीम किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं बल्कि रोजगार, भर्ती और शिक्षा से जुड़े सवालों को सामने लाने की कोशिश के रूप में साझा किया जा रहा है।
