अरुण कुमार गुप्ता
नई दिल्ली में जब से रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री बनी हैं मानो देश की राजधानी नशे का गढ़ बनती जा रही है। यह हम नहीं कह रहे हैं, दिल्ली का एक एडिशनल एसएचओ कह रहा है। लगता है रेखा गुप्ता नशा करने वालों और नशा बेचने वालों को अपनी छत्रछाया में पाल रही हैं। एडिशनल एसएचओ ने जो कहा उसकी एक बानगी देखिए। १२ मार्च को दिल्ली के वजीरपुर की जेजे कॉलोनी में एक बारात आने वाली थी। जिस रास्ते से बारात आनी थी उस रास्ते में दो नशेड़ी नशे में धुत इलेक्ट्रिक रिक्शा से रास्ता रोककर खड़े थे। जब बारातियों ने कहा कि यहां से बारात आनी है। रास्ता छोड़ दो, तो दोनों नशेड़ियों ने अपने १५ से २० और नशेड़ी साथियों को बुला लिया और बारातियों पर हमला कर दिया। यही नहीं नशेड़ियों ने बारातियों में से एक बाराती को मौत के घाट उतार दिया। यह सब सीसीटीवी वैâमरे में रिकॉर्ड भी हो गया, लेकिन पुलिस ने सिर्फ चार लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से भी दो लोगों को छोड़ दिया। इस पर क्षेत्र के एडिशनल एसएचओ ने कहा कि हमारे हाथ कटे हुए हैं। यदि हम नशेड़ियों को पकड़ते हैं तो मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता या उनके विधायकों की ओर से आदेश आ जाता है कि नशेड़ियों को छोड़ दो। अब आपको आश्चर्य होगा कि इस मामले में जहां रेखा गुप्ता को इस्तीफा देना चाहिए वहीं एडिशनल एसएचओ को ही लाइन हाजिर करवा दिया गया। एसएचओ एक बड़ी पोस्ट होती है यदि एसएचओ बड़ी बात कह रहा है तो इस मामले को समझिए कि आने वाले समय में दिल्ली का बेड़ा गर्क होने से कोई नहीं रोक सकता।
सड़क निर्माण में ‘ब्लैक होल टेक्नोलॉजी’ का इस्तेमाल!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। इसकी गवाही देश के विभिन्न क्षेत्रों में बनाए गए हाईवे दे रहे हैं। आपको याद होगा कि कुछ समय पहले नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हाईवे का निर्माण स्पेस टेक्नोलॉजी से किया गया है, लेकिन आए दिन इन हाईवे पर जगह-जगह गड्ढों की खबरें स्पेस टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि ब्लैक होल टेक्नोलॉजी को साबित कर रही हैं। उत्तराखंड के देहरादून में १६ करोड़ की लागत से बना पुल १६ दिन भी नहीं टिक सका। इसके पहले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का हाल भी ऐसा ही कुछ हुआ था, जिसमें उद्घाटन के ५ दिन बाद ही गड्ढे हो गए थे। मोदी जी ने १४ अप्रैल २०२६ को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। १२,००० करोड़ की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर २ महीने में ही जगह-जगह गड्ढे हो गए। आज हालात यह है कि देश में लाखों करोड़ खर्च कर हाईवे, पुल बनाए जा रहे हैं। उद्घाटन में करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं और उद्घाटन के कुछ ही दिनों में घोटाले की सच्चाई सामने आ रही है। यहां यह भी याद रखने वाली बात है कि कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर गड्ढों को लेकर जब योगी के मंत्री से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि ज्यादा तकलीफ हो तो जनता खुद सड़क बना ले। मंत्री जी, यह मत भूलिए कि जनता सड़क भी बनाना जानती है और सड़क पर लाना भी जानती है।
