मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : भारी भरकम ‘कर’, सुविधाएं जीरो

दिल्ली लाइव : भारी भरकम ‘कर’, सुविधाएं जीरो

अरुण कुमार गुप्ता

देश की जनता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के बोझ तले दबी जा रही है। मोदी सरकार नमक जैसे जरूरी चीज पर भी कर वसूल रही है। वेतनभोगी की तो चमड़ी उधेड़ ली जा रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर जीरो। बता दें कि भारत सरकार का सकल राजस्व ४४.००४ लाख करोड़ है, जिसमें शुद्ध कर राजस्व २८.७ लाख करोड़ है, जबकि व्यक्तिगत आयकर दाता १२. ६० लाख करोड़ का योगदान करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि आम करदाताओं को बदले में क्या मिलता है। क्या करदाताओं के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ सकते हैं, सरकारी अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं। ़क्या सामान चोरी होने पर पुलिस वापस दिलाने की गारंटी ले सकती है। अदालतों पर भरोसा किया जा सकता है कि बिना परेशान हुए न्याय मिल जाएगा। सरकारी बाबू मोटी तनख्वाह लेने के बावजूद क्या बिना घूस के काम कर देते हैं। क्या ट्रेनों का समय पर संचालन हो सकता है। कहने का आशय यह है कि भारी भरकम टैक्स देने के बावजूद सरकारी विभागों से आम लोगों को सिर्फ निराशा ही मिलती है, जबकि सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को टैक्स के पैसे से ही मोटी तनख्वाह मिलती है। अब सवाल यह है कि मोदी सरकार कब तक कर दाताओं की चमड़ी उधेड़ते रहेगी।
मोदी सरकार की मुनाफाखोरी
करीब १२ साल पहले मई महीने में ही देश के लोगों ने एक पढ़े-लिखे अर्थशास्त्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को कुर्सी से हटाकर जुमलेबाज को कुर्सी पर बैठा दिया। नतीजा यह है कि देश का हर नागरिक आज बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहा है। मनमोहन सिंह ने जब कुर्सी छोड़ी तो कच्चे तेल की कीमत १०८ डॉलर प्रति बैरेल थी और डॉलर का रेट करीब ५८ रुपए था। उस समय पेट्रोल ७१ रुपए, डीजल ५६ रुपए और सीएनजी ४० रुपए प्रति किलो मिल रही थी। आज अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब ९८ डॉलर प्रति बैरेल से भी कम है, लेकिन पेट्रोल १११ रुपए से ज्यादा, डीजल १०५ रुपए से ज्यादा, सीएनजी ८६ रुपए प्रति किलो मिल रही है और डॉलर ९६ तक पहुंच गया है। मोदी सरकार ने ईरान-अमेरिका युद्ध की आड़ लेकर पेट्रोलियम कंपनियों को हर दिन घाटा बता कर धीरे-धीरे करके पेट्रोल, डीजल, सीएनजी के दाम बढ़ा दिए, लेकिन एक रिपोर्ट सामने आई है जो आंखें खोल देने वाली है। जनवरी २०२६ से मार्च २०२६ के बीच तीनों सरकारी पेट्रोल कंपनियों ने जमकर मुनाफा कमाया है। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान इंडियन आयल ने १८३ प्रतिशत, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने १३३ प्रतिशत और भारत पेट्रोलियम ने ७५ प्रतिशत का जोरदार मुनाफा कमाया है। अब आपको तय करना है हमें क्या करना है। ‘मेलोडी’ खाकर चुप रहना है या अपनी आने वाली पीढ़ी को भी इसी तरह महंगाई की मार से मरने के लिए छोड़ देना है।

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