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उत्तर गौरव : सुनने की नई दुनिया के शिल्पकार हैं डॉ. संजय हेलाले

-ईएनटी चिकित्सा और कॉक्लियर इम्प्लांट में
-उत्कृष्टता के साथ जिंदगी को आवाज देने का संकल्प
संदीप पांडेय

चिकित्सा विज्ञान में सफलता का पैमाना अक्सर आधुनिक तकनीक, जटिल सर्जरी और वर्षों के अनुभव से तय किया जाता है। लेकिन कुछ चिकित्सक ऐसे भी होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनके हुनर से नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति उनकी संवेदनशीलता, धैर्य और सेवा-भाव से बनती है। मुंबई के कुर्ला (पश्चिम) स्थित क्रिटिकेयर एशिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के ईएनटी विभाग एवं कॉक्लियर इम्प्लांट प्रोग्राम के प्रमुख डॉ. संजय हेलाले इसी श्रेणी के चिकित्सक हैं, जिन्होंने चिकित्सा को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बना दिया है। डॉ. हेलाले के क्लीनिक में आने वाला हर मरीज सबसे पहले एक ऐसे डॉक्टर से मिलता है, जो इलाज शुरू करने से पहले उसकी बात पूरी गंभीरता से सुनता है। वे मानते हैं कि सही उपचार की शुरुआत सही संवाद से होती है। ऑपरेशन थिएटर में डॉ. हेलाले के लिए हर सफल सर्जरी केवल चिकित्सकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की आवाज, आत्मविश्वास और जीवन की खुशियां लौटाने का माध्यम होती है। यही सोच उन्हें अपने पेशे में अलग पहचान दिलाती है।
ईएनटी चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों को अपनाने में भी डॉ. हेलाले अग्रणी चिकित्सकों में शामिल हैं। न्यूरोनेविगेशन, नर्व इंटीग्रिटी मॉनिटरिंग, नैरो बैंड इमेजिंग और स्ट्रोबोस्कोपी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से वे मरीजों को अधिक सुरक्षित, सटीक और कम तकलीफ वाला उपचार उपलब्ध कराने पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि चिकित्सा विज्ञान में हर नई तकनीक का वास्तविक उद्देश्य मरीज को बेहतर और सुरक्षित इलाज देना होना चाहिए। वे केवल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि शिक्षक भी हैं। क्रिटिकेयर एशिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के पोस्टग्रेजुएट डीएनबी कार्यक्रम में वे भावी ईएनटी विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करते हैं।
हॉस्पिटल के बाहर भी उनकी सेवा लगातार जारी रहती है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में वे नियमित रूप से नि:शुल्क ईएनटी जांच एवं परामर्श शिविर आयोजित करते हैं। इन शिविरों के माध्यम से हजारों ऐसे लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलती है, जो आर्थिक या भौगोलिक कारणों से बड़े अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते। कई लोगों के लिए यह जीवन का पहला अवसर होता है जब उन्हें किसी ईएनटी विशेषज्ञ से उपचार मिलता है।
डॉ. हेलाले के कार्य का सबसे प्रेरक और भावनात्मक पक्ष जन्मजात बहरे तथा बचपन में सुनने की क्षमता खो चुके बच्चों के लिए किया जाने वाला कॉक्लियर इम्प्लांट है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के ऐसे जरूरतमंद बच्चों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी वे नि:शुल्क करते हैं, ताकि किसी बच्चे का भविष्य केवल आर्थिक अभाव के कारण अंधकार में न रह जाए। इस सामाजिक मिशन को सफल बनाने में लालजी मेहरोत्रा चैरिटेबल फाउंडेशन (एलएमसीएफ), रोटरी क्लब ऑफ मुंबई ब्रेवहार्ट्स (आरसीएमबीएच), रोटरी इंटरनेशनल तथा अनेक समाजसेवी संस्थाओं और दानदाताओं का महत्वपूर्ण सहयोग मिलता है। इन संस्थाओं की साझेदारी ने सैकड़ों बच्चों को पहली बार अपने माता-पिता की आवाज सुनने, बोलना सीखने और सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया है। समाज के प्रति उनके समर्पण और चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें ‘जीवन गौरव पुरस्कार’ सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। परम पूज्य स्वामी हरि चैतन्य महाप्रभु द्वारा प्रदान किया गया ‘चैतन्य पुरस्कार ग्लोबल सम्मान’ उनके सेवा-भाव, करुणा और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
डॉ. हेलाले का मानना है कि बीमारी का समय पर पता लगना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसका इलाज। वे लोगों को कान, नाक और गले से जुड़ी बीमारियों के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूक करते रहते हैं।

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