मुख्यपृष्ठस्तंभउड़न छू : रेगिस्तान का ऊंट

उड़न छू : रेगिस्तान का ऊंट

अजय भट्टाचार्य

मैंने और आप सभी ने एक कहानी सुनी थी या सुनी होगी उस कुत्ते की जो मुंह में हड्डी दबाये उसे चबाने की कोशिश में अपने ही गलफड़े घायल कर लेता है, पर उनसे रिसते खून को हड्डी का स्वाद मानकर हड्डी को और ज्यादा चबाने और चूसने में लग जाता है। ठीक इसी तरह की कहानी रेगिस्तान के ऊंट की भी है। रेगिस्तान में हरियाली नहीं होती इसलिए रेगिस्तान का हर ऊंट झाड़ियां खाता है। उसे झाड़ियां खाने में मजा आता है। कभी सोचा है क्यों? ऊंट जब झाड़ियां खाता है तो उसके मसूड़े छिल जाते हैं, मसूड़ों से खून निकलता है और उस खून से ही उसे मजा आता है, उसे लगता है कि ये मजा झाड़ी से आ रहा है, ये झाड़ी का ही खून है, उसका नहीं। यही स्थिति देश की स्वयंभू हिंदू हितकारी घोषित पार्टी समर्थित हिंदुओं की है। उन्हें लग रहा है कि मुसलमानों को मजा चखाया जा रहा है। लेकिन किसकी कीमत पर? उन्हें पता ही नहीं है। देश चुनावी मोड में है और इस बार गारंटी पर जोर है। तमाम विज्ञापनों में बच्चे ‘थैंक यू फलानेजी!’ कहते नजर आ रहे थे। सत्तारूढ़ गुट देश को पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलरों की अर्थव्यवस्था के सपने दिखा रहा है। हर दिन एक यूनिवर्सिटी बनाने का दावा करनेवाली सरकार आपको यह नहीं बताती कि विश्व की टॉप २०० यूनिवर्सिटी की सूची में देश की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं आती, १२५ करोड़ की जनता के लिए सरकार ने पिछले ६ सालों में १०० सीट की भी एक यूनिवर्सिटी नहीं बनाई। दरभंगा का एम्स सिर्फ उन हिंदुओं को दिख रहा है जो नए किसिम की भक्त प्रजाति में आते हैं।
सच्चाई यह है कि एक अस्पताल बनाकर नहीं दिया, कोई एक एम्स अभी तक तैयार नहीं हुआ। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची के टॉप-१० में से ७ शहर हमारे देश से होते हैं।
ट्रांसपैरेंसी ऑफ इंटरनेशनल रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार के सूचकांक में सबसे भ्रष्ट देशों में सबसे ऊपर नये भारत का नाम है। और तो और जिनके भ्रष्टाचार को खत्म करने का वादा करके हुजूरे आला तख्तनशीं हुए अब वही उनके साथ हैं। वैश्विक भुखमरी सूचकांक के अनुसार भारत में सबसे अधिक कुपोषित बच्चे हैं। और मदर ऑफ डेमोक्रेसी का हाल चंडीगढ़ मेयर चुनाव में देश ने देख ही लिया है। डेमोक्रेसी सूचकांक में देश १० अंक नीचे धड़ाम से गिरा है। देश के केंद्रीय बैंक (रिजर्व बैंक) की रिपोर्ट के मुताबिक ‘करंट अकाउंट डेफिसिट’ यानी सरकार का घाटा पिछले सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। रिजर्व बैंक के ही अनुसार अनर्जक संपत्तियां (एनपीए) यानी बैंकों का घाटा, सदी के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। रिजर्व बैंक से पैसे मांग-मांगकर, देश के केंद्रीय बैंक की हालत इतनी खराब कर दी है कि दो गवर्नर इस्तीफा दे चुके हैं। सरकार बहादुर ने २०२२ तक हर सिर को छत देने और १०० स्मार्ट सिटीज बनाने का जुमला उछाला था। कितनों को घर मिले और १०० में से कोई एक स्मार्ट सिटी तैयार नहीं हुई, यदि हुई है तो नाम बता दीजिए। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और अन्य मौद्रिक एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि सकल घरेलू उत्पाद दर यानी जीडीपी अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसकी दर कभी ८ हुआ करती थी, आज ४ रह गई है। दो करोड़ वार्षिक रोजगार जाने दीजिए, सरकारी आंकड़ों यानी राष्ट्रीय नमूना सैंपल संगठन (एनएसएसओ) के अनुसार रोजगार के आंकड़ें पिछले ४० सालों में सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं। लेकिन मध्यमवर्गीय हिंदू इसी मुगालते में हैं कि चलो कम से कम धर्म तो बच रहा है। प्रधानमंत्री अच्छा भाषण देते हैं, संस्कृत और संस्कृति ऊपर चढ़ रही है। दीपावली पर भव्य दीपक जलने लगे हैं। मंदिर बन रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया है, विदेशों, उल्कापिंडों, ग्रहों, नक्षत्रों, आकाशगंगाओं तक देश का नाम हो रहा है। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज हो गया है आदि-आदि महान कारणों से हिंदू गदगद हैं। हिंदू को रेगिस्तान का ऊंट बनते देखने का चमत्कार दिखाने के लिए ‘थैंक यू फलानेजी!’
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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