मुख्यपृष्ठसमाचारनागपुर के विकास का पैसा फाइलों में कैद!

नागपुर के विकास का पैसा फाइलों में कैद!

-बारिश सिर पर, फिर भी सड़क-नाले अधूरे… सरकार के दावों पर उठे सवाल

-विधानसभा में गूंजा नागपुर का दर्द; मंजूर करोड़ों में से जमीन पर कितना उतरा?

राजन पारकर / विधानभवन

नागपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर में विकास के नाम पर हजारों करोड़ रुपये मंजूर होने के बावजूद जमीन पर कामों की रफ्तार धीमी होने का मुद्दा विधानसभा में गरमा गया। विधायक डॉ. नितिन राऊत ने लक्षवेधी सूचना के माध्यम से सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि बारिश के मौसम में, जब शहर को बाढ़ और जलभराव से बचाने की जरूरत है, तब भी सड़कें, नाले, नदी संरक्षण और मूलभूत सुविधाओं के काम अधूरे क्यों हैं?
राज्य सरकार ने महानगरपालिका और शहरी स्थानीय संस्थाओं के बुनियादी विकास कार्यों के लिए करीब 4,968 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसमें नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र के लिए बड़ी राशि मंजूर होने का दावा किया गया। लेकिन विधायक का आरोप है कि मंजूर निधि की तुलना में वास्तविक वितरण काफी कम रहा, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अटकने की स्थिति में पहुंच गई हैं।
डॉ. नितिन राऊत ने कहा कि सितंबर 2023 में हुई भीषण बारिश और बाढ़ से उत्तर नागपुर सहित कई क्षेत्रों को भारी नुकसान हुआ था। सड़कें, नाले, पिवली नदी और नाग नदी की सुरक्षा दीवारों सहित बाढ़ नियंत्रण के कार्य समय पर पूरे नहीं हुए, तो आने वाले मानसून में नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है।
विपक्ष का सवाल है—
जब सरकार ने पैसा मंजूर कर दिया, तो फिर कामों की गति क्यों नहीं बढ़ी?
नागरिकों की जान जोखिम में डालकर विकास की फाइलें क्यों घूम रही हैं?
उपमुख्यमंत्री ने विधानसभा में जवाब देते हुए कहा कि नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र के लिए विभिन्न विकास कार्यों हेतु निधि मंजूर की गई है। उन्होंने बताया कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त मूलभूत सुविधाओं के सुधार के लिए विशेष पैकेज के तहत भी निधि उपलब्ध कराई गई है तथा सड़क, नदी और नालों की सुरक्षा दीवारों के कार्य शुरू किए गए हैं।
सरकार का दावा है कि नागपुर महानगरपालिका को आवश्यक निधि वितरित कर दी गई है और तकनीकी अड़चनों को दूर कर आगे की प्रक्रिया पूरी की गई है। साथ ही कहा गया कि विकास कार्यों को प्राथमिकता और प्रगति के आधार पर चरणबद्ध तरीके से निधि उपलब्ध कराई जाएगी।
लेकिन जमीनी हकीकत पर सवाल कायम हैं।
क्योंकि बरसात हर साल आती है, बाढ़ का खतरा हर साल सामने आता है, मगर नागरिकों को हर बार वही आश्वासन क्यों मिलता है?
नागपुर की जनता का सवाल सीधा है—
मंजूर करोड़ों रुपये आखिर विकास की जमीन पर कब दिखाई देंगे?
और क्या इस बार बारिश से पहले शहर को सचमुच सुरक्षित किया गया है, या फिर सिर्फ सरकारी घोषणाओं की छतरी लेकर जनता को खड़ा रहना पड़ेगा?
सत्ता के गलियारों में आंकड़े चमक रहे हैं, लेकिन नागपुर की सड़कों पर हकीकत अभी भी कीचड़ में खड़ी है।

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मन पाखी