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संपादकीय : विष्णु का तेरहवां अवतार भी देश को बचा नहीं सकता!

अयोध्या में ‘रामधन’ की लूट की चर्चा देशभर और दुनिया में शुरू रहने के बीच अरुणाचल के कई गांवों पर चीन के कब्जे की खबर चिंता बढ़ानेवाली है। हिंदुओं की भावनाओं की भी लूट शुरू है। चोरों ने भगवान श्रीराम को भी नहीं छोड़ा और इन चोरों को भाजपा का पूरा संरक्षण मिल रहा है। राम मंदिर में चढ़ावे और आभूषणों की चोरी हुई, किंतु मुख्य आरोपियों को छोड़कर शेष सभी की तलाशी पुलिस ले रही है। चीन के मामले में भी स्थिति ठीक वैसी ही है। चीन द्वारा लद्दाख की सीमा में घुसकर भारतीय भूमि पर कब्जा करने की जानकारी सोनम वांगचुक ने उजागर की तो केंद्र के सत्ताधीशों ने वांगचुक को ही ‘देशद्रोही’ ठहराकर जेल में डाल दिया। अब चीन अरुणाचल प्रदेश में घुस आया है। अरुणाचल के अपर सुबनसिरी जिले की सीमा पर रहनेवाले ‘नाह’ आदिवासी समुदाय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीन भारतीय सीमा में घुस आया है। पिछले छह वर्षों में चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने यह घुसपैठ की है। आदिवासियों के पारंपरिक पशु चराने, शिकार करने और कृषि के लिए उपयोग में आने वाले एक बहुत बड़े भूभाग पर चीनी सेना ने कब्जा कर लिया है। अब वहां अरुणाचल के आदिवासियों को चीनी सेना द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया है। इतना ही नहीं, भारतीय सीमा के भीतर स्थित इस भूमि पर चीन ने सड़कें, सैन्य छावनियां बना ली हैं, ऐसा ज्ञापन नाह वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष केरु चाडर ने अपर सुबनसिरी के जिलाधिकारी साहब को
चीनी घुसपैठ के प्रमाण
सहित प्रस्तुत किया है। उसमें वे कहते हैं, ‘‘साहब, भारतीय सीमा के भीतर की यह भूमि हम आदिवासियों के पूर्वजों की है। इन जमीनों और वनों पर ही हमारी जीविका आश्रित है। यह भूमि ही हमारा जीवन है। वर्षों से हम यहां निर्बाध रूप से विचरण करते रहे हैं।’’ अब यह भूमि चीनी पीपल्स आर्मी के कब्जे में चली गई है। सुबनसिरी के ताकसिंग राजस्व क्षेत्र में चीन अत्यंत भीतर तक घुस आया है। चीन ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन किया है। चीन भारतीय सीमा में अपना विस्तार कर रहा है, किंतु आदिवासी समाज द्वारा निरंतर आवाज उठाने के उपरांत भी किसी को भी भारतीय सीमाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा की कोई चिंता नहीं दिखाई दे रही है। अरुणाचल के आदिवासियों का यह आर्तनाद देश के रक्षा मंत्री के कर्णपटल तक पहुंचकर भी निष्प्रभावी है। चीन के सम्मुख घुटने टेकने की मोदी सरकार की नीति के कारण ऐसी घुसपैठ की ओर ध्यान ही नहीं दिया जाता। पश्चिम बंगाल के चुनावों में ‘बांग्लादेशी घुसपैठिया’ एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया जाता है, परंतु अरुणाचल-लद्दाख में चीन की घुसपैठ को ठंडे दिमाग से सहन किया जाता है। यह भारतीय रक्षा व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ाना है। प्रधानमंत्री मोदी और उनका तथाकथित राष्ट्रभक्त दल चीन के इस दुस्साहस पर मौन साधे बैठा है। स्वयं मोदी जी विदेश यात्राओं में व्यस्त हैं और चीन ने अरुणाचल में घुसपैठ कर दी। कम से कम देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को तो इस विषय पर स्पष्टीकरण देना चाहिए था, परंतु वे भी मौन हैं। मोदी और उनके अनुयायी विपक्षी दलों की तैयार की हुई
राजनीतिक भूमि चुराने में
ही धन्यता मान रहे हैं। रोज उठना, दलों को तोड़ना और विधायक-सांसद चुराना, यही उनकी राष्ट्रसेवा है। उसी समय जब चीन भारत की जमीन चुरा रहा है, तब इनकी राष्ट्रभक्ति और हिंदुत्व की चेतना नहीं जागती। पाकिस्तान और बांग्लादेश पर बोलने वाले चीन की सैन्य शक्ति के सम्मुख नतमस्तक हो जाते हैं। चीन ने गलवान घाटी में घुसपैठ करके हमारे २० जवानों की हत्या तक कर दी, परंतु इस चीनी अपराध के लिए कोई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ करने का खयाल प्रधानमंत्री मोदी को नहीं आया। अब अयोध्या के राम मंदिर से दानपेटियां गायब होने के उपरांत भी भाजपा के ये छद्म हिंदुत्ववादी निर्लज्जतापूर्वक ‘‘हिंदुत्व के वास्तविक चौकीदार हम ही हैं’’ ऐसा कहते हैं और चीन भले ही भारतीय भूमि पर कब्जा कर ले, तब भी ‘‘भारत में हमारे सिवा कोई दूसरा राष्ट्रभक्त नहीं है’’ ऐसा रौब यही लोग झाड़ते हैं। भाजपा की राष्ट्रभक्ति और हिंदुत्व मात्र एक पाखंड है। उस दृष्टि से तो ये रावण के ही वंशज लगते हैं। रावण भले ही भाजपा की दृष्टि में दुराचारी रहा हो, परंतु वह पाखंडी हिंदू नहीं था और भाजपा की भांति राम मंदिर की दानपेटियों पर डवैâती नहीं डालता था, यह बात समस्त हिंदू समाज को समझनी चाहिए। राम को लूटा गया, देश की जमीन लूटी गई, लोकतंत्र और संविधान लूटा गया, फिर भी यदि किसी को इस बात का कोई क्षोभ या संताप नहीं है और यही राजनीति यदि सत्य प्रतीत होती है तो इस देश को विष्णु का तेरहवां अवतार भी बचा नहीं पाएगा। इस तेरहवें अवतार ने समाज में केवल स्वार्थ, अनीति और भ्रष्टाचार को ही मान्यता दी है। यह कलियुग की अंतिम पराकाष्ठा है।

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