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‘गद्दारों का करना क्या?’… फैसले में देरी से केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टला… महीने भर इच्छुकों को करना होगा इंतजार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, शिवसेना के चुनाव चिह्न पर जीतकर बाद में गद्दार गुट एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों तथा तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों की सदस्यता से जुड़े मामलों पर अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा कोई पैâसला नहीं लिया गया है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टलता हुआ दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना जताई जा रही थी। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दल बदलकर आए सांसदों के साथ-साथ पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चा है। वहीं अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करनेवाले कुछ मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। हालांकि, गद्दारी कर आए सांसदों को मंत्री बनाए जाने से पहले उनकी सदस्यता से जुड़े मामलों पर निर्णय होना आवश्यक माना जा रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इन मामलों पर फैसला लंबित रहने के कारण मंत्रिमंडल विस्तार का कार्यक्रम आगे खिसक सकता है। इसके चलते मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे कई दावेदारों को फिलहाल और इंतजार करना पड़ सकता है।
दूसरी जब सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की व्यस्तता के चलते भी मंत्रिमंडल का विस्तार लटकता जा रहा है ऐसे में गद्दारी कर सत्ताधारी दल में शामिल हुए सांसदों को मंत्री बनने की इच्छा पर अभी कंट्रोल करने होगा।

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