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राख से मिलती कष्टों से मुक्ति!… बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होली

पूरे देश में होली की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है। इस बार १७ मार्च यानी कल होलिका दहन किया जाएगा और १८ मार्च को होली खेली जाएगी। होली की रात को सिद्धि रात्रि भी कहा जाता है यानी इस रात को किए गए तंत्र उपाय जल्दी ही सिद्ध हो जाते हैं। कहा जाता है कि होलिका दहन की राख से कई सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। देश में होली के त्योहार को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। होली के आठ दिन पहले से होलाष्टक लग जाता है, जिसमें किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाने वाला त्योहार है।
शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का आयोजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन करने के समय का विशेष ध्यान दिया जाता है। होलिका दहन उस समय किया जाता है, जब भद्रा का साया न हो। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त १७ मार्च, गुरुवार की रात ०९ बजकर २० मिनट से लेकर रात १० बजकर ३१ मिनट तक रहेगा। हालांकि इस दौरान भद्रा की पूंछ मौजूद रहेगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भद्रा पूंछ में होलिका दहन किया जा सकता है। इसमें किसी भी तरह का कोई दोष नहीं होता है। ऐसे में १७ मार्च २०२२ की रात्रि को ०९ बजकर २० मिनट से होलिका दहन किया जा सकता है। भद्रा का समापन रात ०१ बजकर १२ मिनट पर होगा।
१८ मार्च को रंगों की होली
होलिका दहन के अगले दिन अबीर-गुलाल और रंगों से होली खेली जाएगी। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत १७ मार्च को दोपहर करीब ०१ बजकर ३० मिनट पर हो जाएगी, जिसका समापन १८ मार्च को दोपहर १२ बजकर ४७ मिनट पर होगा।

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