मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मैं अपनी लड़ाई शांति से जीतना चाहती हूं!’ -प्रियंका चोपड़ा

‘मैं अपनी लड़ाई शांति से जीतना चाहती हूं!’ -प्रियंका चोपड़ा

‘मिस इंडिया’ से ‘मिस वर्ल्ड’ और ‘मिस वर्ल्ड’ से बॉलीवुड अभिनेत्री और बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का सफर प्रियंका चोपड़ा ने बेहद खूबसूरती से तय किया। प्रियंका बॉलीवुड की वो अभिनेत्री हैं जिनकी कामयाबी पर गर्व महसूस होता है। अपने इस प्रेरणादायी सफर में प्रियंका ने मराठी के साथ पंजाबी फिल्मों का सफलतापूर्वक निर्माण किया है। हाल-फिलहाल में प्रियंका ‘जिओ मामी फिल्म फेस्टिवल’ में शरीक हुई थीं। पेश है, प्रियंका चोपड़ा से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 मुंबई आने पर वैâसा लगता है?
बिल्कुल वैसा, जैसे ससुराल गई बेटी जब ससुराल से मायके आती है मुझे वैसी ही फीलिंग होती है। मुंबई शहर ने ही मुझे सफलता दी और मेरी पहचान बनाई। मैंने एक्टिंग के जो गुर सीखे, यहीं सीखे। मेरे जीवन में मुंबई का योगदान बहुत बड़ा है। अपनी मां डॉ. मधु चोपड़ा के साथ मिलकर मैंने फिल्मों का निर्माण इसी शहर में किया। मैंने मराठी और पंजाबी फिल्में बनार्इं। मैंने इस मायानगरी में कई वर्ष बिताएं हैं। लिहाजा, यह शहर मुझे अपना सा लगता है।

 अमेरिका जाने के बाद आपकी जिंदगी में कितना बदलाव आया?
२०१८ में मेरा विवाह निक जोनस के साथ हुआ और मैं उनके देश चली गई। निक से मेरा प्रेम विवाह था। कुछ साल हमने डेटिंग की और फिर शादी का निर्णय लिया। लेकिन विवाह के बाद परमानेंटली अमेरिका जाना और वहीं सेटल होना इस कल्पना से मुझे थोड़ी घबराहट हो रही थी। अमेरिका जाकर कुछ दिनों या चंद महीनों काम कर अपने देश लौट आना यह फीलिंग अलग है और वहीं सेटल होना यह फीलिंग अलग है। लेकिन मन को तैयार कर लिया था कि मुझे वहीं रहना होगा जहां निक और उनका परिवार है। निक और उनके परिवार में मैंने कमाल के भारतीय वैल्यू देखे। बहुत क्लोज हैं सभी पारिवारिक सदस्य एक-दूसरे से। निक के घर शिफ्ट होने के बाद मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैंने अपना घर छोड़ा है। हां, घर के बाहर जरूर अमेरिका लगता है। बेटी मालती के जन्म के बाद मुझे वहां की आदत हो गई।

 मुंबई खासकर बॉलीवुड के रूटीन को क्या आप मिस करती हैं?
यादें तो बॉलीवुड की कई हैं, लेकिन वक्त के साथ आगे बढ़ना आवश्यक बन जाता है। मैं ग्लोबल एक्टर हूं, साथ में फिल्म निर्मात्री हूं। मैं बेटी तो पहले से थी फिर पत्नी, बहू, मां, भाभी यह सभी पारिवारिक रिश्तों को एन्जॉय करती गई। वक्त के साथ मैं आगे बढ़ी और पहले जो देश पराया लगता था अब मुझे अपना सा लगने लगा। हालांकि, मेरे देश, मुंबई, बॉलीवुड के साथ मेरे प्यार और अपनेपन में कोई कमी नहीं आई है। मुझे यहां ‘देसी गर्ल’ का तमगा मिला था, वो भी मेरे सिर आंखों पर और अब मिसेस निक जोनस हूं।

 सफलता के इस मुकाम पर कैसा लगता है?
सफलता मुझे मिली क्योंकि निर्माता-निर्देशक, को-एक्टर से लेकर स्पॉट दादा सहित कई लोगों का मुझे साथ मिला। इन सभी के कंधों पर हम एक्टर सवार होते हैं। हमारे सफलता में इन सभी की मेहनत शामिल होती है। अकेला एक्टर कुछ नहीं कर सकता इसलिए तो यह टीम वर्क है। मेरी सफलता में सभी लोग शामिल हैं।

 क्या आपके साथ कभी अन्याय नहीं हुआ?
अन्यायों की लिस्ट भी है लेकिन कड़वी बातों को भुलाकर आगे बढ़ना ही जिंदगी है। कभी मुझ पर अमेरिका में भी अन्याय हुआ, जहां मुझे पढ़ने के लिए भेजा गया और वहां के स्कूली बच्चों ने मुझे अपनाया नहीं आइसोलेट कर दिया। मेरे लिए यह बड़ा सदमा था। एक फिल्म की शूटिंग के दौरान मेरे एक को-एक्टर ने सेट पर आते ही डायलॉग बाजी शुरू कर दी। जहां मुझे संवाद बोलने थे वहां मेरे हिस्से का संवाद भी वो बोलने लगे। मैं आगे क्या कदम उठाऊं समझ नहीं आया तो मैंने इसकी शिकायत निर्देशक से की। निर्देशक ने बात को समझा और एक्टर महाशय को अपने तरीके से समझाया कि फिल्म में प्रियंका भी है और उसका टर्न आने पर वो अपने डायलॉग बोलेगी। संभवत: एक्टर गुस्से हुए होंगे लेकिन मैंने अपनी समस्या सौम्यता के साथ सामने रखी। मैं अपनी लड़ाई शांति से जीतना चाहती हूं।
 हॉलीवुड में काम करना कितना अलग अनुभव है?
हॉलीवुड में भी कास्टिंग एजेंट्स हैं और उनके जरिए फिल्में मिलती हैं। मैं जब इंडिया में थी मैंने एक एजेंट को हॉलीवुड में नियुक्त किया था जो मेरे लिए मेकर्स के संपर्क में रहता था। मैंने जो काम पाया वो कास्टिंग एजेंट्स के जरिए पाया। अगर किसी अर्थपूर्ण रोल के लिए बार-बार ऑडिशन देना पड़े तो मुझे कोई गलत नहीं लगता। यह एक प्रोसेस है, जिसे फेस करना पड़ता है। इसमें ईगो आड़े नहीं आना चाहिए। हॉलीवुड से बॉलीवुड बराबरी करने लगा है यह देखकर अच्छा ही लगता है।

 

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