डॉ. ममता शशि झा, मुंबई
निरजा अपन अतिमहत्त्वाकांक्षी सोच आ दोसरा के अपना सँ छोट बुझबाक मानसिकता के कारण कुमारिये रहि गेल छलि। अपन उम्रक चालिसम बरखमे पहुँचि गेलि छलि। धीरे-धीरे घरक लोक सभ सेहो किछु कहनाइ बंद कऽ देने छलनि आ घटवैâती करऽ बला सभ सेहो हारि मानि लेने छलाह।
निरजा के फेसबुक पर अपन फोटो बहुत सारा फिल्टरक उपयोग कऽ पोस्ट करनाइ सभसँ मोनजोगर बात छलनि। भोरे-भोर फेसबुक खोललथि तँ एकटा फोटो पर बहुत प्रशंसात्मक कमेंट देखि मोन प्रसन्न भऽ गेलनि। ओहि व्यक्ति के धन्यवाद कऽ ऑफिस लेल विदा भेलथि। रस्तामे व्यक्तिगत रूप सँ ओहि व्यक्ति के फेर मेसेज देखलखिन तँ कनि सतर्क भऽ गेलथि जे कोनो ऑनलाइन प्रâॉडक मामला तँ नहि अछि। मुदा जहिया ओ हुनका कॉलेजक नाम आ साल कहलकनि, तँ विश्वास भऽ गेलनि जे ओ सभ एक्कहि बैचमेट छथि।
हुनका ओकर नाम रघुवीर मोन पड़लनि। एक्कहि कॉलेजमे पढ़बाक समानताक संग-संग दुनूमे एकटा आरो समानता छलनि जे दुनू गोटे अविवाहित छलखिन। रघुवीर अपन फोटो आ मेसेज पठबैत छलखिन आ निरजा सेहो अपन। फेसबुक पर गप्प करैत-करैत, एक-दोसर संग अपन व्यक्तिगत नंबर साझा केलथि आ फोन पर गप्प करैत छह महिनासँ बेसी भऽ गेलनि। तखन दुनू गोटे सोचलथि जे आब सद्है भेट करबाक चाही।
रघुवीर अपन चेहरा चमकाब लेल चारि दिन पहिनेसँ सलून जाए शुरू केलथि आ निरजा पार्लर। दुनूक मोन खुशी सँ भरल छलनि। निरजा सभसँ हँसि कऽ आ स्नेह सँ गप्प करैत छलखिन तँ सभकेँ अचरज होइत छलनि। रघुवीर तँ ‘बड़े मियाँ दीवाने ऐसे न बनो’ गीत देखि-देखि कऽ ओहिके आधार बना अपना के तैयार करैत छलाह। हुनकर ऑफिसक लोक सभ हुनकर बदलल चेहराक रंग-ढंग सँ किछु-किछु आभास लगाबऽ के कोशिशमे एक-दोसरा दिस देखि कऽ मुस्कियाइत रहैत छलखिन। निरजा आ रघुवीर एकटा पार्कमे भेट करबाक सुनिश्चित केलनि। ओतऽ पहुँचि कऽ एक-दोसर के फोन केलथि। आमने-सामने भेलथि तँ एक-दोसरा के देखि दुनू अचंभित रहि गेला। निरजाक फिल्टर बला चेहरा अनावृत भऽ गेल छलनि आ संगे-संग भारी डीलडौल बला शरीर देखि रघुवीर के बुझेलनि जे ओ तँ पिचाइ कऽ मरि जेता। अनेको कन्या के ओ मोट रहबाक कारणे छाँटि देने छलखिन, सरकारी नौकरी आ मोट दहेज भेटबाक बावजूद। रघुवीर अपन एक्कहुटा केश उड़ल बला फोटो निरजा के नहि पठौने छलखिन। आ निरजा अंतिम बेर जे बर देखलथि, हुनका केश उड़ल रहबाक कारणे छाँटि देने रहथिन। दुनू अकबका कऽ एक-दोसर के अनप्रâेंड करैत घर दिस विदा भऽ गेलथि।
