मुख्यपृष्ठस्तंभमुंबई वालों, सांस रोककर सुनिए!

मुंबई वालों, सांस रोककर सुनिए!

मुंबई हाई कोर्ट ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार को एक ऐसी ‘फिल्मी’ लेकिन डरावनी वॉर्निंग दी है, जिसे सुनकर किसी के भी तोते उड़ जाएं। कोर्ट ने कहा कि अगर पर्यावरण की ऐसी ही बैंड बजती रही, तो वो दिन दूर नहीं जब मुंबईकरों को लोकल ट्रेन के पास की तरह हर तीन घंटे में ‘ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन शॉट्स’ का पास जेब में लेकर घूमना पड़ेगा!
मामला था बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव्ज (तटीय वनों) को काटने का। कोर्ट में दलीलें चल रही थीं कि विकास के लिए पेड़ों की बलि तो देनी पड़ेगी, लेकिन जज साहब ने साफ कह दिया- ‘भाई, बुलेट ट्रेन में बैठोगे तो जरूर, लेकिन अगर सांस लेने के लिए हवा ही नहीं बची, तो उस रफ्तार का अचार डालोगे क्या?’
अदालत ने तीखे अंदाज में याद दिलाया कि विकास की अंधी दौड़ में हम कुदरत को हल्के में ले रहे हैं। आज मैंग्रोव्ज कटेंगे, कल मुंबई पानी में डूबेगी और हवा इतनी जहरीली हो जाएगी कि पब में ‘टैकीला शॉट्स’ की जगह लोग ‘ऑक्सीजन शॉट्स’ मांगते दिखेंगे। सीधी बात ये है कि हाई कोर्ट ने सरकार को विकास और विनाश के बीच का फर्क समझाया है।
बुलेट ट्रेन से मुंबई से अमदाबाद २ घंटे में पहुंचना तो ठीक है, लेकिन कोर्ट की इस चेतावनी ने साफ कर दिया है कि अगर पेड़ों को नहीं बचाया, तो जिंदगी की रफ्तार हमेशा के लिए ‘सिग्नल’ पर रुक जाएगी। तो प्यारे मुंबईकर्स, बुलेट ट्रेन का सपना जरूर देखिए, लेकिन जरा संभलकर… क्योंकि हवा मुफ्त है, तब तक ही लाइफ मस्त है!

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