मुख्यपृष्ठग्लैमरमेरी जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही!-रणवीर शौरी

मेरी जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही!-रणवीर शौरी

कॉलेज के दिनों से ही कॉलेज के नाटकों में हिस्सा लेनेवाले रणवीर शौरी ने बतौर वीडियो जॉकी अपना करियर शुरू करने के बाद फिल्म ‘एक छोटी सी लव स्टोरी’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। फिल्म ‘लक्ष्य’, ‘जिस्म’, ‘खोसला का घोसला’, ‘ट्रैफिक सिग्नल’, ‘भेजा प्रâाय’, ‘सिंह इज किंग’ जैसी कई फिल्में उन्होंने की। फिल्म ‘टाइगर ३’ में रणवीर के अभिनय की भूरि-भूरि प्रशंसा हुई। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ‘तब्बर’, ‘रंगबाज’, ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसे कई सफल वेब शोज के बाद अब रणवीर वेब शो ‘सनफ्लॉवर’ सीजन-२ को लेकर चर्चा में हैं। पेश है, रणवीर शौरी से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
‘सनफ्लॉवर’ सीजन २ करने की क्या खास वजह रही?
हर दूसरा कलाकार चाहता है कि वो चैलेंजिंग किरदार निभाए और वेब शो ‘सनफ्लॉवर’ चैलेंजिंग किरदार निभाने का बरबस मौका देता है। मुझे सस्पेंस और थ्रिलर कहानियां आकर्षित करती हैं। मेरा किरदार भी सस्पेंस और थ्रिल से लबरेज है। मेरे लिए चैलेंजिंग किरदार ही इस शो को करने का सबसे बड़ा कारण है।
सुना है, आप इस शो को करने के लिए राजी नहीं थे?
हां, बात कुछ ऐसी थी कि ‘सनफ्लॉवर’ सीजन २ की कहानी मुझे पसंद तो थी लेकिन मेरा किरदार जिस तरह आगे बढ़ता है उस पर मुझे संदेह था। मैंने निर्देशक से बात की तो उन्होंने मुझे कहा अगर मैं उनकी काबिलियत पर विश्वास करता हूं तो मुझे यह शो उनके लिए करना होगा। मैंने निर्देशक की बात पर यकीन किया और चंद सीन करने के बाद मैंने महसूस किया कि निर्देशक की बातों में सच्चाई थी।
सीजन-१ और सीजन-२ में क्या फर्क है?
सीजन-१ की कहानी जहां खत्म होती है, सीजन-२ का थ्रिल कहानी के साथ शुरू हो जाता है। सीजन-२ में कई सनसनीखेज मामले उजागर होनेवाले हैं। बहुत ज्यादा रहस्यों की परतें खुलेंगी। संक्षिप्त में कहूं तो यह सीजन-२ रहस्यों का माया बाजार है। जहां रहस्य है वहां आंखें खुली की खुली रह जाती हैं।
आपका किरदार क्या है?
मेरे किरदार का नाम दिगेंद्र है जो पुलिस इंस्पेक्टर है। मेरा किरदार समस्याओं का निवारण करता है, उसका स्वभाव ही कुछ ऐसा है। इस बार वो गुत्थी सुलझाने का प्रयास करता है लेकिन सारा खेल उसी पर उलट जाता है। खुद ही इंस्पेक्टर वैâसे एक जाल में फंस जाता है और आगे क्या इस जाल से इंस्पेक्टर दिगेंद्र का छुटकारा होता है, यह देखना रोमांचक है।
पुलिसवाले का किरदार निभाने के लिए आपने क्या तैयारियां की?
इस वक्त ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई शोज धड़ल्ले से चल रहे हैं, तयशुदा वक्त में काम पूरा करना यह बजट, लॉजिस्टिक, डेडलाइन सभी के लिए निहायत जरूरी है। जब काम ठीक वक्त पर पूरा करना है तो बहुत ज्यादा वक्त नहीं मिल पाता कि आप एक किरदार के लिए बहुत ज्यादा होमवर्क या रिसर्च करें। यहां ‘सनफ्लॉवर’ के लिए विकास बहल ने एक पूरा रिसर्च किया था। एक बाउंडेड स्क्रिप्ट सभी कलाकारों को दी गई थी।
आपकी अभिनय जर्नी कैसी चल रही है?
मेरे अभिनय सफर को २५ वर्ष हो चुके हैं लेकिन जीवन कभी खट्टा तो कभी मीठा ही साबित हुआ है। लेकिन बॉलीवुड में बहुत कम ऐसे एक्टर होंगे, जिन्होंने जीवन में कोई संघर्ष नहीं किया हो। जीवन का संघर्ष ही इंसान को मजबूत बनाता है, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है इसलिए चैलेंजेस ने मुझे शक्ति दी। मेरी जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही। लेकिन अब वक्त ने मुझे अच्छे मौके देना शुरू कर दिया है।
फिल्म या ओटीटी कौन सा माध्यम आपको पसंद है?
मेरे लिए माध्यम महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है किरदार, उसे निभाने का अंदाज, निर्देशक और कहानी। अगर किरदार सशक्त है तो उसे निभाने का तरीका भी विशेष होना चाहिए। सच कहूं तो मुझे सबसे ज्यादा थिएटर करना पसंद है। लेकिन फुल टाइम थिएटर करना मुंबई जैसे महंगे शहर में मुश्किल है। मैंने फिल्म्स और ओटीटी किया है। लेकिन मेरा पहला प्यार आज भी थिएटर है, जब भी मौका मिले मैं थिएटर करना चाहूंगा।

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