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सवाल हमारे, जवाब आपके!

राज्य सरकार ने ८ लाख रुपए से कम वार्षिक आय वाले परिवार की उच्च शिक्षण प्राप्त करनेवाली लड़कियों की फीस जैसे माफ कर दी है, उसी प्रकार लड़कों की भी फीस माफ करनी चाहिए। लड़का हो या लड़की शिक्षा तो सबको मिलनी चाहिए, आखिर सरकार भेदभाव क्यों कर रही है? इस पर आपकी क्या राय है?

लड़का और लड़की में फर्क न करे सरकार
सरकार को शायद इस बात की जानकारी नहीं है कि चाहे लड़का हो या लड़की सालाना ८ लाख रुपए वार्षिक आय वाले परिवार को दोनों को पढ़ाने में खर्च उतना ही होता है। अगर लड़की की फीस माफ हो जाती है तो लड़के की फीस भी माफ कर दी जाए, इससे सरकार को क्या फर्क पड़नेवाला है। सरकार को कम से कम इस बारे में सोचते हुए लड़के और लड़कियों में फर्क नहीं करना चाहिए।
– सूरज मिश्रा, मीरा रोड

तो यह बड़ा एहसान होगा
माना कि सरकार यह दर्शाना चाह रही है कि वह महिलाओं के प्रति संवेदनशील है तो उसे सिर्फ फीस भरकर ही साबित नहीं किया जा सकता। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की ही बनती है। सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार हमेशा बैकफुट पर ही नजर आती है। जब लड़कियों के साथ अन्याय होता है, उस वक्त सरकार की तेजी दिखाई नहीं देती। पुलिस का रवैया पूरे देश को पता है। सरकार माई-बाप एक बार आप फीस नहीं भरें तो चल जाएगा, लेकिन उन्हें अगर समाज की गिद्ध दृष्टि से बचाने में कामयाब हो जाते हैं तो यह सबसे बड़ा एहसान होगा।
– राहुल वैद्य, साकीनाका

यह नीति भाई-बहनों में दूरी न पैदा कर दे
कभी-कभी ऐसा लगता है कि कहीं सरकार की यह नीति एक ही परिवार में भाई और बहनों के बीच दूरी न पैदा कर दे, क्योंकि जब लड़की की फीस सरकार दे देगी और परिवार के मुखिया को लड़के की फीस भरना पड़ेगा तो कहीं न कहीं लड़के के प्रति उनके रवैये में बदलाव आएगा। जिसे अगर लड़का महसूस करने लगे तो सीधी बात है कि कहीं न कहीं मानसिक रूप से अपनी बहन के प्रति उसका व्यवहार रुखा हो सकता है।
– कविता अग्रवाल, बोरीवली

लड़कों की भी पढ़ाई में सरकार मदद करे
सरकार से गुजारिश है कि वह लड़कियों की फीस माफ करे, लेकिन साथ-साथ उन बच्चों पर भी अपनी कृपा दृष्टि रखे जिनका परिवार सालाना आठ लाख से भी कम में अपना गुजर-बसर करता है। ऐसे कई लड़के हैं जिन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की है। क्या सरकार का फर्ज ये नहीं है कि वह ऐसे लड़कों को भी पढ़ाई-लिखाई में उनकी मदद करे।
– अरविंद सिंह, नालासोपारा

८ लाख का ब्रैकेट क्यों?
एक बात समझ में नहीं आती कि ८ लाख रुपए वार्षिक आय का ब्रैकेट ही क्यों? अगर परिवार की वार्षिक आय ८ लाख रुपए से ज्यादा है और परिवार बड़ा है तो क्या उस परिवार में जो लड़कियों के अलावा लड़के हैं, उनकी फीस देने की कूवत उस परिवार में होगी? क्योंकि फीस तो उन्हें अपने लड़कों की देनी ही होगी।
– अजय कपूर, ठाणे

अगले सप्ताह का सवाल?
हिंदूवादी पार्टी होने का दावा करनेवाली भाजपा की कथनी और करनी में काफी अंतर है। पड़ोसी देशों के पीड़ित हिंदुओं के लिए सीएए कानून बनानेवाली भाजपा ने ७०० हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर सीएए की धज्जियां उड़ा दी हैं, जबकि रोहिंग्याओं को सारी सुविधा दे रही है। आखिर सरकार भेदभाव क्यों कर रही है? इस पर आपकी क्या राय है? अपने विचार हमें लिख भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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