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पेपर लीक: आखिर कब तक?

योगेश कुमार सोनी
सवाल वही…बात वही…जो बीते कई सालों से…एक बार फिर पेपर लीक का मामला सामने आया है, जिसको रोकने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा प्रण लिया था, लेकिन अभी भी इस मामले में हम आज भी ‘ढाक के तीन पात’ वाली कहावत के तर्ज पर खड़े हैं। हाल ही में हुए पेपर लीक मामले में सरकार अपनी पीठ जरूर थपथपा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि यह मामला देश में घुन का काम कर रहा है। बीते शुक्रवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने पुलिस भर्तीभर्ती पेपर लीक मामले में एक बड़े रैकेट को पकड़ी। पुलिस द्वारा अब तक इस मामले में ३९६ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन मास्टरमाइंड की तलाश जारी है, जिसके लिए पुलिस की टीम जगह-जगह छापेमारी कर रही है। शुक्रवार को तीन मुख्य आरोपियों को एसटीएफ की टीम ने गाजियाबाद से गिरफ्तार किया। दरअसल, पेपर लीक करने में ट्रांसपोर्ट के तीन कर्मियों की संलिप्तता पाई गई है। पुलिस को आरोपियों के पास दूसरी पाली का पेपर बरामद हुआ, वहीं आरोपियों के मोबाइल से पेपर लिखे महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे।
एसटीएफ प्रभारी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि १८ फरवरी को यूपी पुलिस की परीक्षा थी, लेकिन परीक्षा से एक दिन पहले दूसरी पाली का पेपर लीक हो गया था। इसके बाद एसटीएफ ने आरोपियों की धरपकड़ भी शुरू कर दी थी। पेपर लीक के मामले में पुलिस ने अब तक उत्तर प्रदेश से ५४ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की पहचान अभिषेक शुक्ला पुत्र ब्रह्मदेव शुक्ला निवासी विक्रमपुर थाना ममरेज जिला प्रयागराज, शिवम गिरी पुत्र राम अचल गिरी निवासी मिर्जापुर व रोहित पांडे पुत्र विजय नाथ पांडे जिला भदोही के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे ट्रांसपोर्ट कंपनी में ही काफी समय से नौकरी कर रहे थे। नौकरी के दौरान ही तीनों एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। इसके बाद आरोपियों ने पेपर लीक करने वाले गिरोह से संपर्क किया था। बताया जा रहा है कि इनका १५ लाख रुपए में पेपर लिख करने का सौदा तय हुआ था, जिसके बाद आरोपियों ने फोटो खींचकर पेपर लीक कर दिया था। आरोपी से रुपए के लेन-देन के बारे में भी कई सबूत मिले हैं। इसके पहले पुलिस पेपर लीक करने के मामले से जुड़े १० आरोपियों को दबोच चुकी है। नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए लगातार पुलिस टीम मामले की छानबीन कर रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती की परीक्षा को हुए भी २५ दिन बीत गए हैं, लेकिन इस परीक्षा के प्रश्न-पत्र के लीक होने का खुलासा अब हो रहा है। यहां उत्तर प्रदेश पुलिस की सबसे बड़ी विफलता यह है कि ऐसी घटनाएं पहले भी कितनी बार हो चुकी हैं और यह किसी भी नजरिए से छोटा मामला नही है। इसके बावजूद इस तरह की घटना होना सरकार के गैर-जिम्मेदार रवैया को दर्शाता है। यह भी समझना होगा कि एक बार पुलिस की परीक्षा कराने में करोड़ों का खर्च आता है। जब पर्चा लीक हो जाता है तो परीक्षा रद्द भी हो जाती है, जिससे सरकार के खजाने का भारी नुकसान होता है। ऐसे मामलों में सरकार को बेहद गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

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