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युआन के सामने भी रुपया नतमस्तक!..चौतरफा महंगाई झेलने के लिए तैयार रहे देश की जनता

उमन गुप्ता

नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के बीच भारतीय रुपया अब सिर्फ अमेरिकी डॉलर ही नहीं, बल्कि चीन की मुद्रा युआन के मुकाबले भी कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ने वाला है, क्योंकि चीन से आयात होने वाला सामान तेजी से महंगा हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी २०२६ से अब तक भारतीय रुपया चीनी युआन के मुकाबले करीब ८ प्रतिशत तक गिर चुका है। भारत और चीन के बीच लगातार बढ़ते व्यापार घाटे को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। वित्त वर्ष २०२५ में भारत ने चीन से करीब ११५ से १२० अरब डॉलर का आयात किया, जबकि निर्यात केवल १४.५ अरब डॉलर तक सीमित रहा। दूसरी ओर चीनी युआन इस साल डॉलर के मुकाबले २ से ३ प्रतिशत मजबूत हुआ है। वैश्विक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें भी १०० डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। इससे भारत का आयात बिल और बढ़ गया है। पहले १ युआन की कीमत लगभग १३ रुपए के आसपास थी, जो अब बढ़कर १४ से १४.२ रुपए तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि भारतीय आयातकों को चीनी सामान के लिए ८ से १० प्रतिशत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

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