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49 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस, अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने पर प्रशासन सख्त

नैनीताल। जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 49 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कदम अभिभावकों से लगातार मिल रही शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया है।

जिन विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें होली एंजल पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, वीवीएम पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, फन विथ ड्राइंग पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, विवेकानंद पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, सनराइज पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, न्यू रेनबो पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, न्यू सनसाइन पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, लिटिल जीनियस पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, किड्स केयर पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, आदर्श पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, मॉडर्न पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, विद्या पुष्प एकेडमी हल्द्वानी, जेम्स पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, सृजन स्कूल गौलापार, लक्ष्मी शिशु मंदिर हल्द्वानी, मीना एकेडमी लालकुआं, होली ट्रिनिटी सीनियर सेकेंडरी स्कूल लालकुआं, एचसीएम जूनियर हाई स्कूल लालकुआं, सनराइज पब्लिक स्कूल रामनगर, लिटिल स्कॉलर एकेडमी रामनगर, सेंट रूमी पब्लिक स्कूल रामनगर, यूएसआर इंदु इंटर कॉलेज बसई रामनगर, दीपक डिवाइन पब्लिक स्कूल रामनगर, मेहरा पब्लिक स्कूल रामनगर, अल्फा मिशन पब्लिक स्कूल रामनगर, शेमरॉक प्री स्कूल रामनगर, डीडीसीएम पब्लिक स्कूल रामनगर, मॉडर्न पब्लिक स्कूल रामनगर, डीएसबी पब्लिक स्कूल रामनगर, गुडलक पब्लिक स्कूल रामनगर, जय मोहन पब्लिक स्कूल रामनगर, एलएन साह प्रिपरेटरी लर्निंग स्कूल भीमताल, डीएसएस पाल पब्लिक स्कूल भीमताल, आयुष्मान कॉन्वेंट स्कूल गरमपानी बेतालघाट, स्कॉलर हेवन स्कूल बिंदुखत्ता लालकुआं हल्द्वानी, एफएस बिष्ट मेमोरियल बिंदुखत्ता लालकुआं हल्द्वानी, बीडी जोशी मेमोरियल स्कूल लालकुआं हल्द्वानी, ग्रीनवुड सीनियर सेकेंडरी स्कूल लालकुआं हल्द्वानी और सनवाल पब्लिक स्कूल नैनीताल प्रमुख हैं।

इससे पहले भी हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली और भीमताल क्षेत्र के 50 विद्यालयों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब तक कुल 99 विद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं।

जांच में सामने आया है कि कई निजी विद्यालय निर्धारित पाठ्यक्रम के अलावा महंगी निजी प्रकाशनों की पुस्तकें अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। साथ ही कुछ विद्यालय विशेष दुकानों से किताबें और अन्य सामग्री खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं और अपनी वेबसाइट पर जरूरी जानकारी भी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।

यह कार्रवाई बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 तथा उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और आर्थिक रूप से न्यायसंगत बनाना है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने सभी संबंधित विद्यालयों को 15 दिनों के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी करने, एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देने, किसी विशेष विक्रेता की बाध्यता खत्म करने और वेबसाइट पर शुल्क व पुस्तक सूची सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अभिभावकों से ली गई अतिरिक्त राशि का समायोजन या धनवापसी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर एक संयुक्त जांच समिति भी गठित की गई है, जो निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट देगी। यदि विद्यालयों ने आदेशों का पालन नहीं किया, तो उनकी मान्यता निलंबित या निरस्त करने के साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हैं और किसी भी लापरवाही को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

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