मुख्यपृष्ठस्तंभश्री-वास्तव उ-वाच : १४ जुड़वां, एक तिड़वां

श्री-वास्तव उ-वाच : १४ जुड़वां, एक तिड़वां

अमिताभ श्रीवास्तव

ये क्या बला है? एक जैसे जुड़वां तक तो सुना है, मगर एक जैसे तिड़वां क्या है? यह दुनिया है, यहां कुछ भी संभव है। दरअसल, एक दिलचस्प वाकया देखने को मिला फ्लोरिडा के एक स्कूल में, जिसने सभी को हैरान कर दिया। हुआ यूं कि इसी महीने की शुरुआत में फ्लोरिडा के एक हाई स्कूल से १०वीं के बच्चे ग्रेजुएट हुए। जब स्टेज पर एक के बाद एक जुड़वा भाई-बहन दिखने लगे तो लोगों के होश उड़ गए। इस भीड़ में १ तिड़वां बच्चे भी थे यानी तीन एक जैसे दिखने वाले एक ही मां की संतान। स्कूल को भी नहीं पता था कि इस बैच में इतने सारे ट्विंस और ट्रिपलेट्स मौजूद हैं। यह वाकया न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट से पता चला। अमेरिका के साउथ फ्लोरिडा में कूपर सिटी हाई स्कूल मौजूद है। ५ जून को हाई स्कूल बैच के ५४३ बच्चों का ग्रेजुएशन डे था। वो अगली कक्षा में प्रमोट हो रहे थे। इस मौके पर पता चला कि बैच में कई जुड़वां और तिड़वां बच्चे भी हैं। इसमें आइडेंटिकल ट्विंस के २ सेट यानी एक दूसरे से मिलती-जुलती शक्ल के २ सेट और बाकी १२ सेट प्रâेटर्नल ट्विंस थे यानी वो एक साथ पैदा हुए थे, पर एक जैसी शक्ल के नहीं थे।
हमारे बीच में हैं एलियंस
एलियंस को लेकर भ्रांतियां हैं, अभी तक कोई भी इस सच्चाई तक नहीं पहुंचा है कि क्या वाकई एलियंस होते हैं? हालांकि, कई सारे दावे किए गए हैं, खोजें हुई हैं मगर कोई नहीं जान सका कि ये कोई जीव हैं भी या कोरी कल्पना ही है? लेकिन अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने एक चौंकाने वाली जानकारी शेयर की है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में ये क्लेम किया गया है कि एलियंस न सिर्फ होते हैं, बल्कि वो गुपचुप तरीके से पृथ्वी पर ही रह भी रहे हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ह्यूमन फ्लोरिशिंग प्रोग्राम ने एक रिसर्च पेपर पोस्ट किया है, जिसके अनुसार दूसरे ग्रह के लोग अंडरग्राउंड हो सकते हैं, चांद की सतह पर रह सकते हैं। यहां तक कि इंसानों के बीच रह कर उनके साथ ही चहलकदमी भी कर सकते हैं। इसके लिए चार खास प्वाइंट्स को ध्यान में रखते हुए ये स्टडी की गई और द क्रिप्टो टेररशियल हाइपोथिसिस पेश की गई है। इसके अनुसार, एलियंस चार अलग-अलग फॉर्म्स में पृथ्वी पर हो सकते हैं। जिन चार फॉर्म में एलियंस की धरती पर मौजदूगी हो सकती है। वो चार फॉर्म कुछ इस प्रकार हैं। पहला फॉर्म है ह्यूमन क्रिप्टो टेररशियल। यानी तकनीकी रूप से ज्यादा एडवांस सिविलाइजेशन जो अब खत्म हो चुकी है। उसके लोग किसी फॉर्म में यहां रहते हों। दूसरा फॉर्म ऐसे जीवों का हो सकता है, जो तकनीकी रूप से विकसित हैं लेकिन सिविलाइज्ड नहीं हो सके। ऐसे जीव अंडरग्राउंड हो सकते हैं। तीसरा फॉर्म ऐसे जीवों का है, जो दूसरे ग्रहों से पृथ्वी तक आए हों, लेकिन खुद को छुपा कर रहे हों। चौथा फॉर्म ऐसे एलियंस का है, जो धरती के लोगों से मेल खाते हों। ये लोग तकनीकी में कम हो सकते हैं, लेकिन मैजिकल हो सकते हैं।
बचिए ऐसे शौक से!
शौक यदि ऐसे कार्यों का हो जो जीवन को ऊंचाई पर ले जाए, जीने के मकसद को पूरा करे तो शौक का अर्थ भी होता, अन्यथा अनर्थ है और ऐसे में जीवन निम्न स्तर का तो होता ही है साथ में हवालात के दर्शन भी हो जाते हैं। अब देखिए न, यह खबर एक उदाहरण है। गाजियाबाद में रहने वाली एक युवती को आईफोन और राडो घड़ी का शौक था। लेकिन उसके पास इतने रुपए नहीं थे कि वो खरीद पाए। शौक पूरा करने के लिए वो पहले नौकरानी बनकर एक घर में घुसी और जब घरवालों का विश्‍वास जीत लिया तो अपना असली रंग दिखा दिया और फरार हो गई। उत्तर प्रदेश पुलिस ने युवती को धर दबोचा। पूछताछ में हुए खुलासे से पुलिस दंग रह गई। इतना दिमाग यदि वो किसी अच्छे कार्य में लगाती तो संभव था, कोई अभूतपूर्व सफलता अर्जित करती और उसका नाम भी होता।
मंगल ग्रह पर बसे यूपी-बिहार के कस्बे
यह कोई मजाक नहीं है, बल्कि सच है कि मंगल ग्रह पर दो नए कस्बे हैं, जो यूपी और बिहार के हैं। दरअसल, मंगल ग्रह की सतह पर हाल ही में खोजे गए तीन गड्ढों (क्रेटर) के नाम लाल, मुरसान और हिलसा रखे गए हैं। अमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) ने इन्हें ये नाम दिया है। पीआरएल के निदेशक अनिल भारद्वाज के अनुसार, ये नाम अंतर्राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार रखा गया है। खोजे गए इन क्रेटर के जब नाम रखने की बारी आई तो मुरसान और हिलसा क्रमश: उत्तर प्रदेश (यूपी) और बिहार के शहर के नाम चुने गए। भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग की  इकाई पीआरएल ने एक विज्ञप्ति में कहा कि तीन क्रेटर मंगल ग्रह के थारिस ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित हैं। थारिस मंगल ग्रह के पश्चिमी गोलार्ध में भूमध्य रेखा के पास केंद्रित विशाल ज्वालामुखीय पठार है। ताजा खोज वैज्ञानिकों की एक टीम की ओर से की गई, जिसमें गुजरात के अमदाबाद स्थित पीआरएल के शोधकर्ता शामिल रहे। जून २०२४ की शुरुआत में एक अंतर्राष्ट्रीय निकाय ने नामकरण को मंजूरी दी।
लेखक ३ दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं व सम सामयिक विषयों के टिप्पणीकर्ता हैं। धारावाहिक तथा डॉक्यूमेंट्री लेखन के साथ इनकी तमाम ऑडियाे बुक्स भी रिलीज हो चुकी हैं।

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