-चीन, भारत और थाईलैंड से सटे सीमावर्ती इलाकों में सेना की नई कार्रवाई; खनिज और व्यापार मार्ग बने संघर्ष का केंद्र
म्यांमार में सेना और जातीय विद्रोही गुटों के बीच चल रहा गृह-संघर्ष अब केवल सत्ता की लड़ाई नहीं रहा, बल्कि खनिज संपदा और सीमा व्यापार मार्गों पर नियंत्रण की निर्णायक जंग बनता जा रहा है। नए सैन्य प्रमुख ये विन ऊ के नेतृत्व में म्यांमार की सेना ने चीन, भारत और थाईलैंड से लगे कई सीमावर्ती इलाकों में फिर से बड़े हमले शुरू कर दिए हैं। रॉयटर्स के अनुसार, इन अभियानों का मुख्य निशाना काचिन राज्य है, जहां भारी रेयर अर्थ तत्वों के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं।
काचिन राज्य चीन की सीमा से सटा है और वैश्विक रणनीतिक अर्थव्यवस्था में इसका महत्व बहुत बड़ा है। यहां से निकलने वाले रेयर अर्थ तत्व इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा संयंत्र, रक्षा उपकरण, मोबाइल फोन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए जरूरी माने जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, काचिन क्षेत्र भारी रेयर अर्थ की वैश्विक आपूर्ति में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए यहां की लड़ाई का असर केवल म्यांमार तक सीमित नहीं रहेगा। सेना की कार्रवाई काचिन तक सीमित नहीं है। भारतीय सीमा से लगे चिन राज्य और थाईलैंड से सटे कारेन क्षेत्र के व्यापारिक गलियारों को भी फिर से नियंत्रण में लेने की कोशिश तेज की गई है। हाल में सैन्य समर्थित प्रशासन ने भारत सीमा के पास टोंजांग और थाई सीमा के पास मावताउंग जैसे रणनीतिक कस्बों पर दोबारा नियंत्रण का दावा किया है। यह संघर्ष इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि म्यांमार की सीमाएं कई देशों की सुरक्षा, व्यापार और संसाधन-नीति से जुड़ी हैं। चीन के लिए रेयर अर्थ आपूर्ति, भारत के लिए पूर्वोत्तर सीमा की स्थिरता और थाईलैंड के लिए सीमा व्यापार-तीनों दांव पर हैं। सेना इन इलाकों को वापस लेकर विद्रोही गुटों की आर्थिक और सैन्य पकड़ कमजोर करना चाहती है, जबकि स्थानीय सशस्त्र संगठन इसे अपनी स्वायत्तता और अस्तित्व की लड़ाई बता रहे हैं। म्यांमार की यह नई सैन्य हलचल बताती है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में एक और सीमा विवाद खतरनाक मोड़ ले रहा है। यहां बंदूकें केवल जमीन के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के खनिजों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार रास्तों के लिए गरज रही हैं।
