मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिईमानदारी की मिसाल बना वासुदेव हॉस्पिटल, महिला का खोया पर्स सुरक्षित लौटाया

ईमानदारी की मिसाल बना वासुदेव हॉस्पिटल, महिला का खोया पर्स सुरक्षित लौटाया

सामना संवाददाता / जौनपुर

आज के दौर में जहां अस्पतालों से मोबाइल, पर्स और अन्य कीमती सामान चोरी होने की खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं, वहीं जौनपुर का वासुदेव हॉस्पिटल ईमानदारी, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों की मिसाल बनकर सामने आया है। अस्पताल ने यह साबित कर दिया कि मरीजों का इलाज केवल दवाइयों से ही नहीं, बल्कि भरोसे और जिम्मेदारी से भी किया जाता है।
नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित एलआईसी कार्यालय के पास संचालित वासुदेव हॉस्पिटल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विकास यादव के नेतृत्व में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। वहीं, अस्पताल का स्टाफ भी अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से लोगों का विश्वास जीत रहा है।
दरअसल, अस्पताल में भर्ती मरीज चंद्रधर मिश्रा का हालचाल जानने के लिए कुछ लोग पहुंचे थे। इसी दौरान अस्पताल की पार्किंग में वाहन खड़ा करते समय एक महिला का पर्स अनजाने में नीचे गिर गया। अस्पताल के एक कर्मचारी की नजर पर्स पर पड़ी तो उसने बिना देर किए उसे सुरक्षित रख लिया। स्टाफ को उम्मीद थी कि पर्स का मालिक जल्द ही उसे खोजते हुए आएगा, लेकिन एक दिन बीत जाने के बाद भी कोई पर्स के बारे में पूछने नहीं पहुंचा।
उधर, जिस महिला का पर्स गिरा था, उन्होंने यह मान लिया था कि शायद रास्ते में या किसी दुकान पर उनका पर्स खो गया है। पर्स में नकदी, चांदी का ब्रेसलेट, घर की चाबियां समेत अन्य जरूरी सामान मौजूद था, लेकिन उसमें कोई पहचान पत्र या ऐसा दस्तावेज नहीं था, जिससे मालिक का पता लगाया जा सके। ऐसे में पर्स वापस मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी थी।
इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने स्वयं पहल करते हुए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में स्पष्ट दिखाई दिया कि पर्स किस वाहन से गिरा था। इसके बाद अन्य कैमरों की रिकॉर्डिंग देखने पर पता चला कि वाहन से आए लोग अस्पताल के प्राइवेट वार्ड नंबर-2 में भर्ती मरीज चंद्रधर मिश्रा से मिलने आए थे। अस्पताल के प्रबंधक ने मरीज के तीमारदारों से संपर्क किया और महिला को उनका पर्स वापस सौंप दिया। पर्स में रखी नकदी, चांदी का ब्रेसलेट, चाबियां और अन्य सभी सामान पूरी तरह सुरक्षित मिले।
अपना खोया हुआ पर्स वापस पाकर महिला और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, स्टाफ तथा विशेष रूप से डॉ. विकास यादव का आभार व्यक्त किया।
यह घटना केवल एक पर्स लौटाने की नहीं, बल्कि उस विश्वास को कायम रखने की है, जो आज के समय में धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। वासुदेव हॉस्पिटल ने यह साबित कर दिया कि एक अच्छा अस्पताल केवल बेहतर इलाज के लिए ही नहीं, बल्कि अपने मानवीय व्यवहार, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए भी पहचाना जाता है।
निस्संदेह, डॉ. विकास यादव और वासुदेव हॉस्पिटल की पूरी टीम का यह सराहनीय कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। यह घटना संदेश देती है कि ईमानदारी आज भी जीवित है और इंसानियत से बढ़कर कोई सेवा नहीं।

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