दुनिया को अपनी ताकत दिखाने निकले डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य तक पर अपना नाम चिपकाने की तैयारी कर ली, लेकिन उनकी युद्धनीति ने अमेरिका समेत दुनिया भर की जनता की जेब में आग लगा दी है। ईरान पर बम बरसाने और होर्मुज पर ‘अमेरिकी अधिकार’ का दावा करने वाले ट्रंप के राज में डीजल ५.८५ डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है, जबकि युद्ध से पहले यही कीमत करीब ३.७६ डॉलर थी। यानी बाहर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ का शोर है और अंदर अमेरिकी बाजार में महंगाई का विस्फोट। एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि होर्मुज अब अमेरिका के नियंत्रण में है, दूसरी तरफ उसी क्षेत्र में ईरान अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है और वैश्विक तेल बाजार बेकाबू हो रहा है। ब्रेंट क्रूड ९५ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा चुका है। नतीजा-ट्रकिंग महंगी, डिलिवरी महंगी, खेती महंगी और रोजमर्रा का सामान भी महंगा। यानी ट्रंप ने ईरान को सबक सिखाने के लिए युद्ध खोला, लेकिन पहला भारी बिल अमेरिकी जनता के घर पहुंच गया। सवाल अब यह है- क्या होर्मुज पर नाम लिख देने से सुपरपावर बन जाती है कोई सरकार? या असली ताकत तब मानी जाएगी जब अपने देश की जनता को महंगाई से बचाया जा सके?
